जितना अधिक ज्ञानं प्राप्नोषिउतना ही यह अनुभूति होती है कि अभी बहुत कुछ अवशिष्टम् अस्ति - Sanjay Chintamani Patel
जितना अधिक ज्ञानं प्राप्नोषिउतना ही यह अनुभूति होती है कि अभी बहुत कुछ अवशिष्टम् अस्ति
- Sanjay Chintamani Patel