Sandhya  
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Joined 17 November 2018


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Sandhya 9 AUG AT 14:45

Impress,
Express,
Or To live without
Stress....

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Sandhya 9 AUG AT 14:40

_Sandhya

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Sandhya 25 JUL AT 14:31

_sandhya

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Sandhya 8 JUN AT 18:40

तेरी रूह है तुझसे कह रही,
तू किस विचार में बही,
सब तेरी मुठ्ठी में है,
तू दौड़ तो लगा के देख ,
बेड़ियाँ भी तोड़ दे,
मोह को भी छोड़के,
दिन नहीं अनेक है,
विलम्ब न तू कर ज़रा,
जिंदगी निकल गयी,
यूँ रास्तों को देख - रेख के,
ज़रा - ज़रा सी बात पे,
न हौंसलों को तोड़ते,
न जाना ओ राही ,
राह से मुख मोड़के।।
--संध्या



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Sandhya 4 JUN AT 14:16

जज्बातों में न गयी होती,
तो गहराइयों में न उतरती,
न कुछ कह पाती किसी से ,
न ही कविता बनती।।

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Sandhya 4 JUN AT 12:45

Why the sadness
in all around,
Neither in sky ,
nor in ground,
why always is this same sound,
Whether it will be
a village or a big town.
Depression, stress every where,
loniless captured
all the tears,
Feelings are hard to percieve,
Loved one said : our messages , calls,
no one recieve.
Who understands it in deep?
They all said: Oh ! please.
--Sandhya

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Sandhya 11 MAY AT 18:46

किस बात की ख़ुशी हो ,
किस बात का हो हमें गम,
न ही नाराज़गी है कहीं,
फिर भी बेचैनी न हो कम,
डूबता इक अँधेरा वही,
खिलता नया सवेरा हो,
खो गया शायद
किसी मासूम जान का,
जैसे बचपन अधूरा हो,
कहावते सुनते हैं
हम इक नए समां
के आने की,

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Sandhya 3 APR AT 14:34

इक अजीब सी दुविधा ,
इक अजीब सी सुबह,
इक वही पुरानी कहानी,
जिसका था सबको पता,
वो दौर कुछ वर्षों का ,
वो दौर बचपने संजोये था,
बस हुआ कुछ नही,
दूरियां बढ़ गयीं
दूरियां बढ़ गयीं।।

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Sandhya 19 MAR AT 23:05

कौन हूँ मै,
क्या पता,
क्या ख़बर ,
निकली हूँ किस रास्ता,
न ही किसी से बैर है,
न ही किसी से वास्ता,
जान भी लिया सभी को ,
अपनापन भी झूठ है,
घड़ी - घडी बदलता जाने ये कैसा रूप है,
न टूट तू बिखर नहीं,
किसी की परवाह मत कर युँही,
चल वहीं जहाँ तेरी चाहत थी रही,
कदम बढ़ा ,
बढ़ा तू फूँक -फूँक के,
कर थोड़ा सब्र ज़रा,
न जिंदगी से रूठते,
न जिंदगी से रूठते।।



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Sandhya 15 FEB AT 23:23

वो स्कूल के दिन---- आगे पूरा पढ़ें।👇

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