Sandhya  
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Joined 17 November 2018


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Joined 17 November 2018
Sandhya 19 MAR AT 23:05

कौन हूँ मै,
क्या पता,
क्या ख़बर ,
निकली हूँ किस रास्ता,
न ही किसी से बैर है,
न ही किसी से वास्ता,
जान भी लिया सभी को ,
अपनापन भी झूठ है,
घड़ी - घडी बदलता जाने ये कैसा रूप है,
न टूट तू बिखर नहीं,
किसी की परवाह मत कर युँही,
चल वहीं जहाँ तेरी चाहत थी रही,
कदम बढ़ा ,
बढ़ा तू फूँक -फूँक के,
कर थोड़ा सब्र ज़रा,
न जिंदगी से रूठते,
न जिंदगी से रूठते।।



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Sandhya 15 FEB AT 23:23

वो स्कूल के दिन---- आगे पूरा पढ़ें।👇

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Sandhya 13 FEB AT 20:11

क्यों लिख रहा हूँ मैं ,
न कोई इंतेजार है ,
न कोई बीता खुमार है,
न कोई दीदार है,
न किसी बोझ में
जिंदगी दुश्वार है,
जाने क्यों लिख रहा हूँ मैं.......

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Sandhya 13 FEB AT 19:39

किस राह का पथिक हूँ
मैं क्या जानूँ,
किस राह में भटकूँ
न मैं जानू ,
किस -किस से पूंछूं
किस की मैं सच मानूँ,
कैसे इस दिल में रखलूँ,
कैसे मन को मैं समझालूं,
किस राह का पथिक हूँ
मैं क्या जानू।।
--संध्या

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Sandhya 9 FEB AT 12:15

एक मुझे भी चाहिए !
एक मुझे भी दिलाइए!
बच्चों में बस यही शोर हो!

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Sandhya 9 FEB AT 11:53

एक स्वप्न👇

(कविता)

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Sandhya 8 FEB AT 8:39

मोहब्बत की बस यही इन्तेहाँ हैं,
दूर होकर भी सबकुछ बयां हैं,
आखिर ये कैसी सज़ा है,
असल में इसी में तो असली मज़ा हैं,
मोहब्बत की बस यही इन्तहा है।

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Sandhya 7 FEB AT 23:59

A person who loved you
more than you thought,
Only the thing is that ,
He never realize ,
He always cares ,
But when he is in problem ,
Never be share....
He is our inspiration ,
He is our HERO,
He is a Father,
No one in the world as such
He is Harder.........



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Sandhya 7 FEB AT 23:27

Heart to touch,
Is to hard to touch,
Feelings which leads
difficult to deal.....

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Sandhya 7 FEB AT 19:30

किससे कहें
कोई मिला ही नहीं,

रूठा भी दिल तो किसको
फिकर और किसको ख़बर,
भटक रहे कभी इधर,
तो कभी उधर,
जाने कब मिलेगी
ख्वाबों की वो डगर
जिसके लिए तड़प है
उस दिल के भीतर ।

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