Sandeep Vyas  
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Joined 30 December 2016


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Joined 30 December 2016
Sandeep Vyas 12 OCT AT 21:04

Life mantra:

Hunger is until the first roti is swallowed,
the rest is greed...

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Sandeep Vyas 11 OCT AT 8:43

रावण के डर से देखो, इंसान अब भी काँप रहा है
कल जला कर आये, आज सड़कों से झाँक रहा है

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Sandeep Vyas 8 OCT AT 12:13

जला कर एक पुतला, हर बार यही करता रहा
दिल में राम, दिमाग में रावण लिए फिरता रहा

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Sandeep Vyas 5 OCT AT 14:29



खुद के लिए, खुद से ज्यादा, उसको चाहना,
इश्क से बड़ी कोई खुदगर्जी, दुनियाँ में नहीं

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Sandeep Vyas 3 OCT AT 9:32

"मंगल मिशन"
(अनुशीर्षक में)





हम ज़िन्दगी के सुराग चाँद और मंगल पर खोज रहे हैं, जबकि धरा पर ज़िन्दगी तड़प रही है, ज़िंदा लोग भी लाशों में तबदील हुए जाते हैं!

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Sandeep Vyas 1 OCT AT 16:07

माँ तू हमारे बीच रही, किसी और सूरत में,
और हम नासमझ, तुझे खोजते रहे मूरत में

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Sandeep Vyas 27 SEP AT 11:34

जूझने को, अब मुझे, कुछ और मसाइल दे मौला
आदत में शुमार नहीं मेरी, ज़िन्दगी आसां हो जाना

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Sandeep Vyas 26 SEP AT 22:29

'झूठ'
महज़ एक
शब्द नहीं
रंग है
किरदार का
जो उभरता है
जब सच
सोख लेता है
अन्य सारे विकल्प...

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Sandeep Vyas 25 SEP AT 21:16

मैं तो
चाहता हूँ
कि तुम कभी
मुझ से 'प्यार' न करो..

जो जज़्बात
एक शब्द में सिमट जाएँ
वो मेरे लिए ना-काफी हैं..

मेरे लिए एहसासों को
बयाँ करना हो कभी
शब्द उपयोगी नहीं
एक समूची सृष्टि
फिर गढ़ना होगी तुम्हें..

रचना होगा मेरे इर्द गिर्द
अपने एक एक कण से
एक नया संसार जहाँ
सिर्फ तुमसे ही हो
आदि, अंत, अनंत...

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Sandeep Vyas 24 SEP AT 22:10

फिर वही बिछड़ी हुई छाँव लाया हूँ
मैं तेरी खातिर शहर में गाँव लाया हूँ

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