दिन मुकम्मल हुआ था गदीर में ,
बचा है कर्बल की ज़मी पर ।।
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मौला अब्बास ع का मानिंद हु
वफादारी का किरदार रखता हु
इसलिए ही आज ये ऐलान करता हु,
अभी से मुख्लिस , मुनाफिकों से सारे राब्ता ख़त्म करता हु।। ❤️🖐🏻-
अभी आज़माइश-ए-इश्क़ के इम्तहान में हु ,
इसलिए अपने वक्त के इंतज़ार में हु ll-
हम इसलिए अपने बुजुर्गों की सिख पर चलते है ,
नए को पकड़ कर हम अपना मसलक नहीं बदलते ll-
कट कर गिरी जो ज़ुबान मीसम की ज़मीन पर
तमाम ज़मी पुकार उठी कहकर या अलीع मदद ...-
तारीख है गमगीन ,
अर्श से फर्श है सुर्ख ,
गम में है सारा जहा ,
काफिला जो पहुंचा है मैदान ए करबला 🥺-
तमाम सोचो मे तेरा खयाल अफजल मेरे मौला अलीعلیسلام
तमाम यादों में तेरी याद आला मेरे इमाम हुसैनعلیسلام-
Masjid-e-Kufa ho ya Medaan-e-Karbala
Jere Khanjar Sajda Abu Talib ka hai .-
इश्क ए हैदरع में फकीरों की यही निशानी हैं .
हर मुश्किलो में मुश्किलकुशा या अलीع मदद
केह देना आदत खानदानी है ❤️✋🏻-
मुश्किलों की मुश्किलें बड़ा दी में ने ....
नाम मुश्किल कुशा का ले कर .... ❤️-