हकीम थोड़ी है जो सबकी दवा करता है
कोई पूछे उससे
क्यूँ मेहबूब मेरा हर इक से वफ़ा करता है
जताता है, लुटाता है, निभाता है
हाँ पर मोहब्बत के नाम पे दगा करता है-
यही मेरी माशूका है, यही मोहब्बत है।
A Journalist !!
इस ब्रह्मांड की सबसे खूबसूरत चीज़ पता है क्या है?
किसी स्त्री का प्रेम में होना।
और सबसे बुरी चीज़ है,
उस प्रेम का अधूरा रह जाना।
फिर ना प्रेम की पराकाष्ठा बचती है,
ना स्त्रीत्व की मर्यादा।-
तलब चाँद की और किसी ख़ाकसार को तकते हो
एक बात बताओ, ज़मानेभर से मोहब्बत कैसे करते हो?
बातें मुझसे, वादे मुझसे और वफ़ा की कसमें सबसे
यार लानत है, तुम तो महफ़िल की हर बला पे मरते हो।-
तुम दरिया हो, समंदर हो
तेरे लबों पे प्यास अच्छी नहीं लगती
हसीं सूरत, गोरा बदन, उभरा तन
हाँ पर तुम बेलिबास अच्छी नहीं लगती-
दिल का नाज़ुक, क्या कहूँ
मेरी नरमी आजमाने वालों से
कि अब फर्क नहीं पड़ता
यूँ आने जाने वालों से-
ये जो मेरे आसपास दिख रही है तुम्हें
इस महफ़िल से मेरा कोई वास्ता नहीं
तन्हाई ही सफर है और यही मंजिल है
यकीन कर, इससे इतर कोई रास्ता नहीं-
इश्क में हमनवाई देखी और फिर जुदाई भी
मेहबूब ने मोहब्बत की और फिर बेवफाई भी-