Sakshi Mishra   (Sakshi Mishra)
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A pharmacist who plays the part of a writer, a poet, a speaker and an athlete.
Joined 25 June 2018


A pharmacist who plays the part of a writer, a poet, a speaker and an athlete.
Joined 25 June 2018
23 NOV AT 18:10

I returned your favour with my emotions, and boom! Got into the trap.

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15 NOV AT 20:45

The day you feel completely broken is the day you can actually start restoring every broken piece!

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13 NOV AT 23:24

From writing in a diary and trying hard to hide it, to writing on public domains, we grew up so fast!

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13 NOV AT 0:31

मेरी उंगलियां थाम बस चलती रही वो, मेरे इशारो पर, मेरे रास्तो पर।
सुख , दुख के साथी बन, सफर लंबा तय कर लिया हमने।
मेरी सिसकिया समझकर उसे आकार देती थी वो,
मेरे एहसास को जान दिया है उसने,
कौन कहता है कलम दोस्त नही हो सकती?

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8 NOV AT 21:08

तमाम शिकवे गिनाकर, कभी समझकर तो कभी समझाकर,
खूब लड़ते झगड़ते फिर एक हो जाते,
पर इस बार रह गए जो ख़ामोश दोनो ही, मानो तय थी जुदाई।

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24 OCT AT 9:49

From deciding not to share her writings, to write just for sharing, the writer reincarnated many times in a single life!

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22 OCT AT 13:11

करके भरोसा तुमपर, तोड़ दिया था खुद को..
एक नए आकार की चाहत में, तुम्हारी उंगलियो के उस एहसास की चाहत में, और चाहत थी तो बस तुम्हारी मुझपर टिकी नज़रों की।

पर तुम?
मेरे उन टूटे टुकड़ो को उठाकर जोड़ते रहे अपने खोखले हिस्से!

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19 OCT AT 17:37

,
सांस और ज़िन्दगी के इस
फासले को मैं आज भी सिर्फ़
तम्हारे नाम से बुलाती हूं।

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18 OCT AT 18:51

She could not solve any of my problems, but listened all them very carefully.
And that helped me more than solutions could!

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17 OCT AT 0:06

क्या कहूँ, कितना कहूँ और क्यों कहूँ,
तुम तो बस सुनते हो फिर भूल जाते हो,
न ही समझते हो, और न सुलझाते हो।।

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