है प्यार क्या...
मुझे क्या पता जो ये मुझको हुआ
कैसे रोकूँ खुद को तुझे सोचने से
अभी एक कतरा अरमां बाकी है
है प्यार क्या, तुझे है पता??-
एक सफ़र वो भी होता है
जिसमें पांव नहीं
दिल थकता है
जिसमें पांव नहीं
दिल दुखता है
जिसकी राहों में पड़े निशां
कभी नहीं मिटते
जिसमें मिले ज़ख्म
कभी नहीं भरते-
उनसे हुई मोहब्बत में
मिले ज़ख्म बहुत गहरे है
फिर उनके इंतज़ार में हम
आज भी वही ठहरे है-
सुनो
दफ़न हो जाओ ना तुम
अब मुझमें ही कहीं
अपनी यादों के साथ
क्योंकि
अब तुम्हारा मुझमें ज़िंदा होना
मुझे पल पल मार रहा है-
तुम्हारे जाने के बाद...
वो जो हमारे बीच हुई बातें थी ना...
वक़्त के साथ बस एक धुंधली सी
याद बन कर रह गयी है....
जो कभी जीने को वजह हुआ करती थी...
अब मरने की वजह बन रही है...-
लबों तक पहुँच गए तुम कितनों के
यूँ ही बात तिलों की करते करते
जिस्मों तक पहुँच गए तुम कितनों के
यूँ ही बात दिलों की करते करते-
बातें उसी की करनी है
बेशक उससे मेरी बात ना हो
रातें उसी के नाम करनी है
ऐ जिंदगी
बेशक दिन तेरे नाम के हो-
अकेली वारिस हूँ उसकी तमाम नफरतों की
जिसके सारे शहर में आशिक हज़ार है-
याद आई है तुम्हारी
तो तुम भी आओगे ज़रूर
यकीन है मुझे तुम पर
अपनी मोहब्बत पर....-
तेरा बिसरा सा हिस्सा हूँ मैं, मेरी ज़िंदगानी है तू
एक टूटा किनारा हूँ मैं, मगर गंगा का पानी है तू
तेरे मेरे किस्से में अगर फर्क है, तो वो है इतना कि
तेरी आधी कहानी हूँ मैं, मेरा पूरा किस्सा है तू-