Sakshi Jaiswal  
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Joined 3 November 2018


Joined 3 November 2018
24 OCT 2019 AT 11:08

है प्यार क्या...
मुझे क्या पता जो ये मुझको हुआ
कैसे रोकूँ खुद को तुझे सोचने से
अभी एक कतरा अरमां बाकी है
है प्यार क्या, तुझे है पता??

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21 OCT 2019 AT 0:01

एक सफ़र वो भी होता है
जिसमें पांव नहीं
दिल थकता है
जिसमें पांव नहीं
दिल दुखता है
जिसकी राहों में पड़े निशां
कभी नहीं मिटते
जिसमें मिले ज़ख्म
कभी नहीं भरते

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20 OCT 2019 AT 22:34

उनसे हुई मोहब्बत में
मिले ज़ख्म बहुत गहरे है
फिर उनके इंतज़ार में हम
आज भी वही ठहरे है

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16 OCT 2019 AT 11:49

सुनो
दफ़न हो जाओ ना तुम
अब मुझमें ही कहीं
अपनी यादों के साथ
क्योंकि
अब तुम्हारा मुझमें ज़िंदा होना
मुझे पल पल मार रहा है

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16 OCT 2019 AT 11:39

तुम्हारे जाने के बाद...
वो जो हमारे बीच हुई बातें थी ना...
वक़्त के साथ बस एक धुंधली सी
याद बन कर रह गयी है....
जो कभी जीने को वजह हुआ करती थी...
अब मरने की वजह बन रही है...

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3 JUL 2019 AT 10:35

लबों तक पहुँच गए तुम कितनों के
यूँ ही बात तिलों की करते करते

जिस्मों तक पहुँच गए तुम कितनों के
यूँ ही बात दिलों की करते करते

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12 MAY 2019 AT 18:46

बातें उसी की करनी है
बेशक उससे मेरी बात ना हो
रातें उसी के नाम करनी है
ऐ जिंदगी
बेशक दिन तेरे नाम के हो

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21 APR 2019 AT 12:54

अकेली वारिस हूँ उसकी तमाम नफरतों की
जिसके सारे शहर में आशिक हज़ार है

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20 APR 2019 AT 23:02

याद आई है तुम्हारी
तो तुम भी आओगे ज़रूर
यकीन है मुझे तुम पर
अपनी मोहब्बत पर....

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19 APR 2019 AT 20:06

तेरा बिसरा सा हिस्सा हूँ मैं, मेरी ज़िंदगानी है तू
एक टूटा किनारा हूँ मैं, मगर गंगा का पानी है तू
तेरे मेरे किस्से में अगर फर्क है, तो वो है इतना कि
तेरी आधी कहानी हूँ मैं, मेरा पूरा किस्सा है तू

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