Sahani Baleshwar   (Sahani Baleshwar)
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Joined 20 June 2017


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Joined 20 June 2017
Sahani Baleshwar YESTERDAY AT 11:40

Things have changed,a lot.
Where once beautiful butterflies
had their nests
been turned into a place
where sun sets.
A little I know
about the child's storms
that dreams are knife
and one day he will die
to be born as a monster,
to rule over his kind.

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Sahani Baleshwar 14 JUN AT 12:30

Although my story
is not the story of
beauty and the beast.
But someday,
I'll travel to the east
to fulfill her last wish.
Some roads will lead me
and some will set me free,
Cause I know
what is hidden
in those deep sea.

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Sahani Baleshwar 12 JUN AT 12:30

जिस्म के भूख में
तुम हद से भी आगे गुजर जाओगे ,
मैं जलकर राख हो जाऊँगी
और तुम छू तक ना पाओगे |
प्यार-मोहब्बत-ईश्वर-अल्लाह
तुम सबका दरवाज़ा खटखटाओगे ,
पर मेरे नाम के अक्स को भी
तुम सात जन्मो तक ढूंढ ना पाओगे |

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Sahani Baleshwar 25 MAY AT 18:14

हैरान हूँ कुछ चेहरों की
मासूमियत को देख ,
मक्कारी और जालसाजी का नकाब
हटायें नहीं हटता |
छुपायें हैं ना जाने कैसे-कैसे राज़
इन्होंने अपनी रूह तक ,
दिल तोड़ो भी तो
इनका खुदा उफ्फ़ नहीं करता |


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Sahani Baleshwar 22 MAY AT 18:08

मेरी तन्हाई और मेरी परछाई
दोनों साथ-साथ ही रहती हैं ,
मेरे सो जाने के बाद
ये ना जाने क्या-क्या बातें करती हैं |
कभी मेरी नींदेँ उड़ाती हैं
तो कभी घंटों रुलाती हैं ,
चुन-चुन कर कुछ सवाल
ये बार-बार आग सी बरसाती हैं |

इनके रोज़-रोज़ के ताने
ये दिल झेल नहीं पाता ,
अपराजित योद्धा सा
अकेले इनसे भीड़ हैं जाता |
उनके शीशेँ सी चम्किले घमंड को
ये पल भर में तोड़ देता हैं ,
घसीट कर दोनों को
अतीत में ले जाता हैं |

" मर चुके थे तुम दोनों भी उस दिन
क्या समुंदर के नाम से कुछ याद नहीं आता ?
तड़प रहा था मैं अकेले
किसी के जीने-मरने से तुम्हारा क्या हैं जाता "...

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Sahani Baleshwar 10 MAY AT 20:38

आधी-आधी रात को
आँखो ने अपना दरवाज़ा खोला ,
अपना ही हाथ पकड़े
मैनें आँसूवो से ये बोला .....

" जल ही तेरा जीवन हैं
और दर्द ही तेरा साया ,
अब क्या लौटकर आएगी वो
जो बन चुकी हैं एक माया |
ये कोई भ्रम नहीं
हैं ये इंसानी छाया ,
यहाँ तो उसने अपना सब हैं खोया
जिसनें कभी गल्ति से कूछ ना पाया ".....

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Sahani Baleshwar 7 MAY AT 19:19

कुछ खट्टी-मीठी सी हैं ये मेरी तन्हाई
कभी गूद्गुदाकर
तो कभी रुलाकर
मुझसे पुछ ही लेती हैं
कि वो जो एक बार गईं
तो फिर लौट कर क्यूँ नहीं आई हरजायी |

इसके इतने घातक से सवाल को
मैं अक्सर चुटकुलो में बदल देता हूँ ,
कुछ देर की आँख-मिचोली के बाद
मुस्कुराकर धीरे से इसके कानों में बोल देता हूँ
कि वो ना ही थी कभी हरजायी
और ना ही कभी उसने की बेवफाई
बस अपनों की चाह में
आ गईं हम दोनों में लंबी जुदाई |

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Sahani Baleshwar 3 MAY AT 20:56

ऐ खुदा इस ज़मी पर कही तो तेरा नूर होगा
आसमान को ज़मी से तुने मिलाया तो कभी ज़रूर होगा |

बदलते देखा हैं तुने
पूरी कायनात को ,

अब तो बता दे ,
मेरे जाने के बाद
मेरी कब्र पर रोने कोई आया तो ज़रूर होगा |

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Sahani Baleshwar 26 APR AT 18:51

दिल के वो हजारों टुकड़े
रूह में काँटों से थे चुभते ,
हकीम मेरे नाज़ुक हालत देख
खुदा से बार-बार कुछ थे पूछते |

" क्या मोहब्बत-ए-निशान
जिस्म से रूह तक उतर जाता हैं ?
ज़िन्दा होकर भी इंसान
क्यूँ तडप-तडप कर मर जाता हैं ?

क्या रूह और जिस्म में
सिर्फ़ इतना ही फ़रक होता हैं ,
पूजा तो आप को जाता हैं
फिर शैतान ही हर जगह क्यूँ होता हैं ?

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Sahani Baleshwar 18 APR AT 18:28

बरसों बाद शब्दोँ को
शब्दों से द्वंध पर बुलाया हैं |
किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले
उनकी जड़ों को
तेज़ तूफ़ान की हवावोँ से हिलाया हैं |

चला ना जाये किसी एक का भी गहरा वार खाली
इसलिए एक पक्ष में रामायण
तो दूजे पक्ष में महाभारत के महारथियों को
मैनें पहली बार
आमने-सामने से लड़ाया हैं |

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