साहित्य श्री   (Ashlesha Amber)
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Joined 8 October 2019


Joined 8 October 2019

जो भी होगा
आज नही तो कल होगा
निश्चय निरंतर प्रेरणा है
निश्चय ही लक्ष्य को भेदना है

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शक के पौधे को पानी डालना बंद करें
विश्वास के फूल फिर खिल जायेंगे

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आने की इजाज़त दोगी क्या
तुम रूठ जाओ प्यार में
मनाने की इजाजत दोगी क्या
ख्वाब को हकीकत करने दोगी क्या

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जो करना है
आज अभी करो
वक्त रुकता नही
किसी के लिए
वक्त जाया न करो
वक्त वक्त का हिसाब
लेता है वक्त आने पर

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आज नहीं तो कल होगा

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इश्क के इम्तिहान
जीते जीते जी
देनी पड़ती है जान
फिर भी हार जाते है
इश्क के सारे इम्तिहान
आखिर में रह जाते हैं
आंख में आंसू जीवन भर
देह रह जाती है बेजान
धरती ताकती रह जाती है
युगों युगों तक आसमान
यही है इश्क यही अंजाम

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जग रूठे तो रूठन दे

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झोकना पड़ता है
खुद को मेहनत की भट्टी में

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खुद से खुश रहना
किसी से उम्मीद न करना
हर जीव से प्रेम करना
परमात्मा को प्राप्त करना

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कठिन हैं बहुत
सारी उम्र निकलती है
साबित करने में खुद को

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