✍️🎀🐾" हर्षित एवं उत्साही बच्चे "🎀🍊🍇

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दिनों के पल, जल्द नहीं बदल रहे थे।
पंख बच्चों के अब ऐसे निकल रहे थे;
जैसे उड़ान भरने वो आतुर हों आसमान में!
भ्रमण करने हों तत्पर कोना छान जहान में।
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वैसे तो परिश्रम देखते ही बनती थी उनकी!
इंतजार थी उन्हें परीक्षाओं के मानसून की।
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शांति से घर पर ही रहकर
अनेकों परीक्षाएँ दी सबने!
अचानक इतने दिनों बाद ऐसी
न जाने क्यों लीला रची रब ने।
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परिक्षाओं में लिप्त बच्चों को देखना
बड़ा ही सुकून देता है दिल को अब।
सीखते वो जो हैं नियम, धर्म, सत्कर्म कर
सुगंधित करते हैं महफिल को अब।

- ✍️ ऋषि (भारतर्षि)🔱