Rohit Singh Thakur   (Shayar-e-udgir)
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Joined 1 October 2017


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Joined 1 October 2017
Rohit Singh Thakur 5 HOURS AGO

सत्ह से अक्सर साफ़ नज़र आता पानी
गहराई में गंदा होता है।

ज़माने भर को अपनी अच्छाई दिखाने वाला
फ़रेब का चोला ओढ़े होता है।

बहुत होती है कोशिश छिपाने की,सच तो सच है यारों
आज नहीं तो कल सबके के सामने होता है।

भर जाता है जब घड़ा फ़रेब का
लाख हुनर वाला भी भीड़ में अकेला होता है।

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Rohit Singh Thakur 8 NOV AT 19:37

A moment of Lust
is more than enough
to shatter
years of Trust

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Rohit Singh Thakur 8 NOV AT 17:18

तेरी रग-रग से
कुछ इस तरह से वाक़िफ़ हो गया हूँ।

तेरे होंट मानो गिटार की तारें
और मैं जैसे उनपे चलते तेज़ हाथ हो गया हूँ।

तेरे कहने से पहले
मुझे पता होता है की तुझे क्या है कहना।

हर बात, चाहे हो वो कितनी ख़ास या आम
ज़माने से पहले मैं जान लेता हूँ।

तेरी रग-रग से
कुछ इस तरह से वाक़िफ़ हो गया हूँ।

तेरे होंट मानो गिटार की तारें
और मैं जैसे उनपे चलते हाथ हो गया हूँ।

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Rohit Singh Thakur 7 NOV AT 19:14

करोड़ों की पुश्तैनी जायदाद
किस काम आएगी?

आँखे बंद होते ही
लोग “शव” कह कर बुलाएँगे।

कुछ घंटों में
या तो ज़मीन दोस्त हो जाएगा।

या किसी झाड़ की सुखी लकड़ी
जला कर ख़ाक कर जाएगी।

'अस्थि' बन, एक कलश
में कुछ दिन बिताएगा।

गंगा में बहाकर
आत्मशांति प्रदान कर दी जाएगी।

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Rohit Singh Thakur 7 NOV AT 18:15

मेरे सारे सवालों का जवाब
“एक तु ही”

कड़ी धूप के बाद, बारिश की बौछार
“एक तु ही”

दिल के हर कोने में जो है, वो ख़ास
“एक तु ही”

मेरे दिन-रात, सारे जज़्बात है जिससे
“एक तु ही”

पसीने से भरे बदन को मिली एक शीतल हवा का झोंका
“एक तु ही”

जीऊँगा, जीतूँगा, मरूँगा ख़ातिर जिसके, वो इंसान ख़ास
“एक तु ही”

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Rohit Singh Thakur 7 NOV AT 17:36

बातें तो बहुत सारी होती है
पर सब याद हर किसी को नहीं रहता।

रुला तो हर कोई देता है
पर ज़िंदगी में मुस्कान कोई नहीं भरता

रुका तो हर कोई लेता है
पर ज़िंदगी भर साथ कोई नहीं चलता।

ज़िंदगी, एक कशमकश हो चली है
हर सवाल का जवाब अब नहीं मिलता।

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Rohit Singh Thakur 2 NOV AT 17:28

बदन को ख़ून से ख़ाली कर दो,
तब भी ये दिल तेरे लिए धड़केगा।

मैं रहूँ चाहे कहीं भी
बिन तेरे मेरा कोई वजूद न रहेगा।

पानी की मौजूदगी में तो हर गुल है दमकता
शाख़ पर खिले फूल से कहाँ मुक़ाबला रहेगा?

जी-जान झोंक दी हमने, एक ख़ातिर तेरे
ये भरोसा में की, शायद मेरी मय्यत पे सही चाँद तो निकलेगा।

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Rohit Singh Thakur 2 NOV AT 1:10

देख उन्हें जो नशा चढ़ा था
वैसा नशा कभी किसी को ना हुआ होगा।

प्यार तो कर लेता है हर कोई
मेरे जैसा दीवाना कोई ना हुआ होगा।

नसीब को कोस, हर कोई हार मान लेता है
मुझसा जाँबाज़ कोई ना हुआ होगा।

शबनम भरी सुबह में तो हर गुल दमकता है
कोई कड़ी धूप में, कली से गुलाब कभी ना हुआ होगा।

ख़ुशियों की घड़ियों में तो साथ हर कोई था
अंगारों पर खड़ा साथ, हर कोई ना हुआ होगा।

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Rohit Singh Thakur 1 NOV AT 15:41

जले दिल की आग से
घर उजाड़ा और कोई।

उस घर में जो सो रहा था
ख़ामोशी से जो जी रहा था

उसकी हँसती ज़िंदगी को
उजाड़ आया कोई ।

ग़ुस्सा कहीं का
उतारा कहीं।

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Rohit Singh Thakur 1 NOV AT 15:33

एक लड़की
कितना कुछ सहती है।

तोड़ अपने सपनों को
पलकों पे अपने परिवार को बिठाती है।

कर घर से मिलों का फ़ैसला तय
अपने दफ़्तर वो जाती है।

एक पुकार पर अपने वालिद के
छोड़ सारा आसमान, अपना घर बसाती है।

क़ैद कर ख़ुदको पिंजरे में
किसी अपने में अपना अक्स वो खोजती है।

एक लड़की
कितना कुछ सहती है।

तोड़ अपने सपनों को
पलकों पे अपने परिवार को बिठाती है।

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