Rohit Singh Thakur   (Shayar-e-udgir)
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Joined 1 October 2017


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4 JUN 2023 AT 23:08

अपने आप को गर लग जाये
जो चोट कभी।

ख़ुद को भी मरहम
लगा देना।

बडा बेरहम है ये ज़माना
ज़ख़्म देता है हज़ारों

बना कर कोई बहाना

सह कर दर्द अपना
तुम हल्का मुस्कुराना

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4 JUN 2023 AT 18:07

सब के बच्चे बड़े हो रहे है।

और एक मैं हूँ

मेरा बचपना ही ख़त्म
नहीं हों रहा।

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8 MAY 2022 AT 13:19

कौन सुनता है यहाँ किसी की
हर कोई अपने आप में व्यस्त है।

चाहे निकल जाए जान किसी की
हर कोई अपने आप में मस्त है।

नहीं ज़रूरी की सब कुछ कर जाओ
दो बातें तो कर लो, जहां ज़रूरत है।

लगता सब को है की, वही सब से ख़ास है।
बताना नहीं है, महसूस करवाने की ज़रूरत है।

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3 MAY 2022 AT 17:07

मोहब्बत अब मोहब्बत कहाँ रही जाना।
अपने हिस्से बस धूल, दौलतमंद चूम रहे है पैमाना।

दिखा कर सपने सुनहरे, लग के गले हज़ारो दफ़ा मेरे।
चल दिया वो लेकर, किसी और के संग सात फेरे।

मायूस नहीं अब भी ये दिल मेरा, खुश है तेरी ख़ुशी में जाना।
पल में बदल गया इश्क़ तेरा, हम अकेले भर रहे है हरजाना।

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8 MAR 2022 AT 18:26

महिलाओं का कोई एक दिवस नहीं होता है।

उनके होने से ही हम सब का हर दिन होता है।

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6 FEB 2022 AT 16:48

सफ़र हर किसी का
कुछ यूँ ही खत्म होता है।

जाने वाला चला जाता है,
अपनी छाप छोड़ जाता है।

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4 FEB 2022 AT 16:38

Kadr har kisi ki
Najaane kyun uske jane ke baad hoti hai

Jab roz nazar aata hai koi chehra
Uski aadat jyaada lag izzat kam hoti hai

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13 NOV 2021 AT 17:47

खुद ही के घर में सोना नसीब नहीं होता।
अपनों के कंधे पे सर रख के रोना नसीब नहीं होता।

यूँ तो कर आते है मदद सारे ज़माने की।
बस अपनों का दर्द हमसे दूर नहीं होता।

लाख मना करती है माँ मेरी, के ना जा तू दूर।
बदनसीबी तो देखो, बिना बिछड़े गुज़ारा नहीं होता।

ये बस बातें है सारी “रोहित”, के बिन पैसे भी परिवार चलते हैं।
उन्हें चलाना नहीं है हमें, कमबख़्त उनके साथ चलना नहीं होता।

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8 NOV 2021 AT 1:03

तेरा नाम लिखा काग़ज़ पे और मिटा दिया।
तेरा नाम लिखा काग़ज़ पे और मिटा दिया।

सोचा क्या ही अलग हुआ होगा?
जो कुछ लिखा था वो तो मिटा दिया।

पर इतना आसान और सरल कहाँ होता है प्रेम।
बस ऐसे ही कहाँ किसी का नाम मिट जाता है।

प्यार में पड़ने को शायद एक पल भी ना लगे कभी
प्यार को भुलाने में शायद एक ज़िंदगी भी कम पड़ जाए।

इतना सरल नहीं है ये प्यार “रोहित”।
जो नाम लिखने और मिटाने से शुरू और ख़त्म हो जाए।

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21 AUG 2021 AT 19:54

अहमियत रिश्तों की कौन है समझता यहाँ?
मुट्ठी भर है लोग, जिनको रिश्ता समझता है यहाँ।

कोई करने को है हासिल धन-दौलत।
कोई बस ज़मीन-जायदाद हड़पना चाहता है यहाँ।

‘मर जाए ये बुढ़िया एक दफ़ा’ ये रोज़ सोचता है कोई,
झूठी सामाजिक इज़्ज़त से डर, वो बस कहता नहीं है यहाँ।

रिश्ते? या खेल ? क्या समझ रखा है इन्हें? लोगों ने रोहित।
मतलब इनका बस अपने मतलब से समझता है हर कोई यहाँ।

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