Rohit Singh Thakur   (Shayar-e-udgir)
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Joined 1 October 2017


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Joined 1 October 2017
YESTERDAY AT 17:27

निरंतर निहारता रहता हूँ मैं उसकी नादानियाँ।

कुछ कहता नहीं कभी, बस मुस्कुरा देता हूँ।

और वो पढ़ लेता है मुस्कान मेरी

और मुस्कुराकर जवाब भी देता है।

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YESTERDAY AT 17:14

डरता हूँ मैं अब भीड़ से।
तन्हाई में सुकून मिलता है।

मुस्कुराता भी नहीं अब।
ये बस नज़रें चुरा लेता है।

सितम कई सहे ज़माने के
अब अकेले में ही ये रहता है।

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29 NOV AT 14:40

I always give my 💯 percent to save any relation.
But not at the stake of my self-respect ✊

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27 NOV AT 20:57

Hai NaaRaazgi teri Laazmi
Ye baat khoob samajhta hu main..

Kuch Pal ki bhi doori tujhse
Milne ko Tadapta jaata hu main..

Hua karte the saath Hardam
Teri ek jhalak ko tarasta hu main..

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27 NOV AT 2:32

जब भी आॅनलाईन देखता उसे देर रात..
उससे बस एक ही सवाल करता..

सोयी नहीं अब तक?

और हर रात मुझे
अब एक ही जवाब मिलता।

बस सोने ही जाने वाली थी।

और मेरे अंदर चल रही ढेर सारी बातें
अंदर ही दम तोड़ देती।

कुछ समय बाद
बस ख़ामोशी रह गयी थी।

जब तक वो हरी आॅनलाईन की बत्ती ढलती नहीं..
मेरी आँख बंद नहीं होती।

ये सोच के, शायद आज वो मेरा हाल पुछले?

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25 NOV AT 13:39

नहीं उठाया करते
बेवजह सवाल दोस्ती में।

यारी जब गहरी हो
सारे जवाब आँखों में मिल जाते हैं।

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25 NOV AT 13:26

ज़िंदगी ख़ूबसूरत है।
कभी बेबाक है, कभी अल्हड़ है।

कभी झूमती है, कभी नचाती है।
कभी बड़ी तेज है, कभी रुकाती है।

कभी मजेदार है, कभी रुलाती है।
सब कुछ अब इसमें,

बस कभी-कभी
जिंदगी ख़ुद को तलाशती है

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25 NOV AT 13:08

संभल जाने को
बदल जाने को

समय से पहले
भाग जाने को

सारे किए वादे
तोड जाने को

जी जाने को
वफ़ा कर जाने को

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25 NOV AT 0:20

रात हो गई
बात रह गई

दिल बैठ गया..
हाय ये क्या हो गया..

चाहा था कहना..
आज बहुत कुछ उनसे...

फिर एक दफे सूरज निकला..
और चांद भी सर चढ़ गया...

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23 NOV AT 1:50

इस सूखे में मर ना जाए।

लगायी है आवाज़ तुमको
तहे दिल से ओ दिलबर।

एक दफे ही सही, बिछड़ने से पहले
अपना दीदार तो करवाओ।

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