Rohit Singh Thakur   (Shayar-e-udgir)
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Joined 1 October 2017


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13 SEP AT 23:44

हर कोई चीज़ की बिक्री होती है।

पर क्या बताऊँ तुमको
हर चीज़ की एक क़ीमत होती है।

सब चाहते है ख़रीदना
हर किसी की कहाँ हैसियत होती है।

बिलखता है ग़रीब यहाँ
अमीर की झोली ख़ुशियों से भरी होती है।

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11 SEP AT 22:40

जब चैन से आँखें मूँदी, तो ये ख़्वाब आया।
मुहब्बत वालों की ज़िंदगी में सैलाब आया।

रहा करते थे हम भी भटके-भटके से कभी।
जब वो ज़िंदगी में आया, तो ठहराव आया।

सब कहते थे सितारा मेरे महबूब को,
वो मेरी ज़िंदगी में मेहताब बन था आया।

जब करते हैं याद उन ख़ुशियों भरे पलों को,
हर बार आँखों ने शीतल आँसू है छलकाया।

जब चैन से आँखें मूँदी, तो ये ख़्वाब आया
मुहब्बत वालों की ज़िंदगी में सैलाब आया

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9 SEP AT 19:17

तरस वाली दोस्ती नहीं
हक़ वाला प्यार चाहते हैं।

माथा पीट-पीट कर दर पर
दोस्ती की गुहार लगाना नहीं चाहते हैं।

कर लिया हमने कर्तव्य अपना पूरा
बदले में उसके कुछ और नहीं चाहते हैं।

तरस वाली दोस्ती नहीं
हक़ वाला प्यार चाहते हैं।

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12 AUG AT 0:23

हमने दिल से एक वादा किया है।
ना करेंगे उनको याद, ये इरादा किया है।

प्यार तो करता है हर कोई।
हमने उनसे प्यार, बेशुमार किया है।

हर बार किया भरोसा हमने।
हम पर चाकु से पीठ पर वार किया है।

नहीं संभलता फिर भी ये दिल।
ना जाने उस ज़ालिम ने क्या जादू किया है।

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5 AUG AT 0:06

अगर हो प्यार, तो ही रिश्ते बनाना
बोझ तो कुली भी उठा लेता है।

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29 JUL AT 16:56

Ego with a pinch of insecurity,
negligence and jealousy
is a perfect recipe to kill a relation.

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26 JUL AT 23:09

ज़िंदा रहते सराहे कलाकारों को
उनके गुज़र जाने का इंतज़ार क्यूँ करते हो?

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25 JUL AT 19:26

COVID - 19 : वायरस जो जीना सिखा दे

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24 JUL AT 18:12

मुबारक हो तुमको रिश्वती हवाईजहाज़
मैं तो अपनी दो पहियों पर ख़ुश हूँ।

घूम लो तुम सारे देश,अंतरिक्ष
मैं अपने माँ-बाप के साथ ही ख़ुश हूँ।

कर लेना तुम शौक सारे पूरे
मैं अपनों की ज़रूरतें पूरी कर ख़ुश हूँ।

कर लेते हो बातें दिन-रात परायों से
मैं अपनों संग हमेशा रहकर ख़ुश हूँ।

कहते है जो सब का हो सकता है
वो ख़ुद का नहीं होता।

मैं “रोहित” हूँ बस अपनों के लिए,
परायों के लिए मैं शायद ही कुछ हूँ।

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23 JUL AT 20:29

जो अपनों से तहज़ीब से बात करना तो छोड़िए
ढंग से उनके हाल-चाल भी नहीं पूछता है।

ऊपरवाला भी कमाल है, उसी को ऐसा काम दिया
जिसमें वो हर पराए की सहायता कर उसे धन्यवाद लिखता है।

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