Rohit Singh Thakur   (Shayar-e-udgir)
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Joined 1 October 2017


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Rohit Singh Thakur 23 JAN AT 11:00

मैंने उनसे कहा ‘हम आपको बहुत चाहते हैं’।
फिर किसी ने चाय की बात की
और हमने नज़रें नीची करली।

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Rohit Singh Thakur 6 JAN AT 21:54

तेज़ाब चवन्नी का


अनुशीर्षक में पढ़ें

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Rohit Singh Thakur 3 JAN AT 19:30

जब हमसफ़र हो ख़ास
कोई सफ़र आम नहीं होता।

जो नशा उनकी आँखों से पीने में हैं
वो नशा कोई और जाम नहीं देता।

डूब के उस नशे में धूत हो जाते है हम
कोई होश-ओ-हवास नहीं रहता।

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Rohit Singh Thakur 3 JAN AT 15:36

चारों दीवारों पर
तेरी तस्वीरें लगा देने से

अगर मैं तेरे दिल
के क़रीब हो जाता।

मैं एक अंधा बन, अपने मन में
“तेरी” एक छवि बनाता।

और शाम-ओ-सहर बस
उसे ही एक टक निहारता।

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Rohit Singh Thakur 2 JAN AT 21:58

ना केक, ना मोमबत्तियाँ
ना जाम, ना ग़ुब्बारे थे।

कुछ अपने, एक कॉल, उनकी मुस्कान,
और हम २०२० के हो गए थे।

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Rohit Singh Thakur 2 JAN AT 9:07

विलायत से लाए “की होल्डर” पर
कार की कुंजी टँगी रह जाएगी।

हॉल की संग-ए-मरमर की दीवारों पर
सजी तस्वीर पे फूलों की माला चढ़ जाएगी।

ख़ुशियों से भरी ये ज़िंदगी
पलभर में गमगीन हो जाएगी।

रखना क़दम संभाल कर “ऐकसेलेरेटर” पर,
वरना क़िस्मत पलट कर रह जाएगी।

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Rohit Singh Thakur 31 DEC 2019 AT 19:54

शाख़ पर बैठा बंदर, अब डरता है हमसे

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Rohit Singh Thakur 31 DEC 2019 AT 12:20

एक लाश को भी मैंने तैरते देखा है।
आसान सा ये करतब करते देखा है।

नहीं आता कई ओ को आज भी तैरना,
मैंने उनको रोज़ समंदर से खेलते देखा है।

रुक जाती है साँसें इनकी, एक लहर के उठते
ख़ातिर परिवार के उनको उसमें उतरते देखा है।

एक लाश को भी मैंने तैरते देखा है।
आसान सा ये करतब करते देखा है।

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Rohit Singh Thakur 31 DEC 2019 AT 0:51

जन्मदिन के सारे तोहफ़े समेट के सोया हूँ।
एक अरसे बाद मैं ख़ुशी के आँसू रोया हूँ ।

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Rohit Singh Thakur 26 DEC 2019 AT 17:47

सालों पहले किताबें
इसलिए भी प्यारी थी

क्यूँकि किसी की
ख़ूबसूरत तस्वीर

वो हमसे भी ज़्यादा
महफूज रखती थी।

और उसे किसी
और का ढूंढ़ना मानो

समंदर में मोती ढूँढने
जितना मुश्किल था।

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