Rohit Singh Thakur   (Shayar-e-udgir)
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Joined 1 October 2017


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Joined 1 October 2017
21 AUG AT 19:54

अहमियत रिश्तों की कौन है समझता यहाँ?
मुट्ठी भर है लोग, जिनको रिश्ता समझता है यहाँ।

कोई करने को है हासिल धन-दौलत।
कोई बस ज़मीन-जायदाद हड़पना चाहता है यहाँ।

‘मर जाए ये बुढ़िया एक दफ़ा’ ये रोज़ सोचता है कोई,
झूठी सामाजिक इज़्ज़त से डर, वो बस कहता नहीं है यहाँ।

रिश्ते? या खेल ? क्या समझ रखा है इन्हें? लोगों ने रोहित।
मतलब इनका बस अपने मतलब से समझता है हर कोई यहाँ।

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20 JUL AT 14:53

आना और जाना तो रीत है जीवन की।
कई लोग आते है और चले जाते है।

जो लोगों के दिल में घर कर जाते है।
वो "नसीर" या "इरफान" हो जाते है।

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17 JUL AT 15:31

दिल तु इतना कमज़ोर क्यूँ है।
बातें सारी दिलपर लेता क्यूँ है?

आ जाती है नमी आँखों में।
तु ग़म में इतना तपता क्यूँ है?

हर पल है तुझको आस सकूँ की
तु इतना दर्द से डरता क्यूँ हैं?

है मासूम तु जितना,है उतना बेवक़ूफ़ भी
तु ग़लत इंसानों से उलझता क्यूँ है?

मुहब्बत के मर्ज़ में जकड़ जाता है तु,
सारे बदन को परेशान करता क्यूँ है?

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4 JUL AT 20:42

दिखावे वाला प्यार हक़ीक़त हो जाता।
तेरा मेरा रिश्ता उम्र भर का हो जाता।

चुमा तो कई दफ़ा तस्वीरों मुझे तुमने।
काश वो प्यार दिल में भी उतर जाता।

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27 JUN AT 18:55

किसी ने शादी कर ली
किसी के दो बच्चे हो गए।

हमको देश के अनाथ,
गरीब बच्चे नजर आए।

कुछ समय के लिए उनके हो गए।

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26 JUN AT 21:09

कमाल है ये कुदरत का।
के उसका हर रंग कुछ कहता है।

कभी ये आसमाॅं काला होकर डराता है
कभी यही नीला गगन सुकून देता है।

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20 JUN AT 21:53

पिता वो पेड़ है बरगद का।
जिसकी छांव में हम बड़े होते है।

खुदका खयाल कभी नही रखते।
हमेशा हमारे लिए खड़े होते है।

अपनी जरूरतें भी पूरी नही करते।
हमारे शौक पूरे करने पे अडे होते है।

जब न चल पाए कदम उनके।
उनका सहारा बन खड़े होते है।

ये तो कुछ भी नही है उनके बलिदान के आगे।
हम कभी दो घूंट पानी भी पिला दे तो सुनाने लगते है।

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20 JUN AT 15:10

हर ज़िद पूरी कर, बचपन सँवार लेते हैं।
जवानी में ज़िम्मेदारियों से रूबरू करवाते हैं।

ख़ुद एक जोड़ कपड़ा नहीं ख़रीदते।
हमारी अलमारी खचाखच भरवाते हैं।

दुख-दर्द के सारे घूँट हँस कर पी जाते हैं।
जताते नहीं कभी, बेशुमार प्यार बाँटते हैं।

इल्म नहीं होने देते है हमें अपनी क़ुर्बानियों का
चेहरे पर हरदम एक चौड़ी मुस्कान सजाते हैं।

नहीं जानते हम इन्हें ईश्वर या अल्लाह के नाम से।
ये सारे लोग दिखते बड़े आम हैं, पिता कहलाते हैं।

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19 JUN AT 0:44

बस सांसें भर लेने से इंसान ज़िंदा नहीं रहता।
जब कोई ख़ास होता है साथ तो वो हर पल जिता है।

एक हाथ, किसी का साथ जब छूट जाता है।
इंसान अकेलेपन से मरता है फिर दुनिया छोड़ जाता हैं।

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17 JUN AT 22:35

लेकर मैं रंग सारे चौके से,
ख़ातिर तेरे कुछ पेश करना चाहता हूँ।

जैसे तु खिलाती है मुझे,
उस छोर से मैं भी तुझे देखना चाहता हूँ।

हल्दी का पीला, मिर्च का लाल,
मिलाकर सारे रंग प्यार लिखना चाहता हूँ।

नहीं है पड़ी मुझे इस ज़माने की,
तेरे नाम ज़िंदगी की हर शाम करना चाहता हूँ।

है तमन्ना, तो रहना आज़माती मुझे
तेरे हर इम्तिहान में अव्वल आना चाहता हूँ।

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