Rita Duggal   (Asshu)
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Joined 10 June 2018


Joined 10 June 2018
Rita Duggal 4 HOURS AGO

जिंदगी तेरे इश्क़ में, क्या से, क्या बना दिया, शोला हमें,
और शबनम सी बरसी तेरी रहमतें। जिंदगी तेरा,अजीब
फलसफा, नेमतों की की बारिश, मगर इश्क़ की दास्तां,
को पहेली बना, उलझा दिया। जिंदगी तुझसे इश्क़ क्या,
हुआ, तो मुहब्बत खफा सी हो गयी और, अब लगता,
है, कब जिंदगी का सफर खत्म़ कर जा मिलें उसे।

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Rita Duggal 15 HOURS AGO

इल्म़ है कि नामुमकिन है तेरा, हमसफ़र बन हमकदम,
बनना, नाराज़ है, नासाज़ है दिल, मलाल है माना ना,
होगा, मुमकिन करना, तस्ववुऱ किसी और का, अबचुन,
लिया, बना लिया कलम को, अजीज, लिख, के, दिलके
जख्म़, खामोश जजबात़, सिसकतीआहें, पा, लेते हैं,
सुकून, तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँं,मेधावी योग्य लेखक,
मित्रों की जो सच्ची सराहना करगमसे उबारलेते हैं।

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Rita Duggal YESTERDAY AT 3:16

माना हो ना पाई, और हो भी नहीं पायेगी ताउम्र हमारी,
कहानी मुक्कमल, फिर भी खत्म़, फना हो गई, अभी,
पूर्णविराम नहीं लगा, समाप्त नहीं हुई, बाकी है, कुछ़,
कोरेपन्ने, अधूरी किताबे इश्क़ के, बस वक़्त के साथ,
कुछ़ जख्म़ भरे हैं, मगर कुछ़ आज भी हरे हैं, येअधूरी,
दास्तान खत्म़ होगीयहाँं, मगर, पूरी होगीअगले जन्म।

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Rita Duggal YESTERDAY AT 1:27

तुम हो बेजार, हम बेकरार, तुम हो, बेख़बर, हमें याद,
हर पल- पल, की, यादों, का सफ़र। तुम, क्या जानों,
जुदाई का सबब, अगर खफा हो मुझसे तो दुनिया के,
लिए ही सही, मिलने आ जा, दोस्ती की ख़ातिर नासही,
रकीबों को जलाने के लिए ही आ जा। तुम, क्या जानो,
हिज्र का दर्द, वस्ले यार में, बेहाल,का,हाल,खुद,ही देख

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Rita Duggal YESTERDAY AT 0:33

मासूम हसरतों ने दम तोड़ा, बेमतलब़ के इल्जामों से,
तेरे, तुमको क्या, फर्क?! बेकरार, बेजार, जीना, मुहाल,
हुआ, मगर तुम्हें इससे क्या?! इश्क़, मुहब्बत से उठा,
दिल, दुनिया लगेविरानी, तुम्हें क्यूँं फर्क पडने, लगा।
हो जायेंगें रुकसत जहां से, सीने में दफऩ राज, बेख़बर
रहोगे, इंतिहाऐ वफा से, तुम्हें क्यूँं फर्क पडने लगा?!

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Rita Duggal YESTERDAY AT 14:37

खामोशी कुछ़ इस कदर छाई है, जहनो दिल पे, कि अब
तो खुद से भी खुद की बात नहीं होती।

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Rita Duggal YESTERDAY AT 13:40

मौन, वार्तालाप,मन का संताप, विहग सी चंचलता, मूक
प्रेमालाप, हृदय के जजबात़समझते थे।सारा जग जब,
करता मेरा परिहास, एक तुम, ही थे मेरीप्रेरणा। खुद को
जब-जब पाया हतोत्साहित, तन्हा, भीड़ में भी, अकेला
ले हाथ में हाथ, बने, हमकदम,। कृष्ण सुदामा सी,
मित्रता हमारीकभी ना होगी मोहताज परख कीकसौटी
की, हम, बनेंगे, उदाहरण एक और एकग्यारह का।



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Rita Duggal YESTERDAY AT 12:45

ऐसा जैसा पँंछी का नीड़ से, शिशु का, माँ से, कृषक का
धरा से, तारों, सितारों का आसमान से अटूट, नायाब़,
भावनात्मक रूप से बँधा। मनुष्य़ को जमीं से सशक्त,
रुप से पैर जमा, आसमान विजयी, करने के ख्वाबसजा
उनको साकार करने में प्रयासरत रहना चाहिए। जमीं,है
कुम्हार सी, जो हमें साकार रुप में ढाल योग्य, बनासके।

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Rita Duggal 17 AUG AT 3:20

इश्क़ के समंदर में, डूब कर, उबरने, की लज्जत बैठ,
साहिल, पे, इश्क़ की ख्वारियां, नाकामियां गिनानेवाले,
क्या जानें?! एक पुरसुकून, पुरकशिश, लज्जतेहुस्नो-,
जमाल, कमाल।लज्जते,इंतजार का क्या कहना,राजी,
क़यामत तक, मुंतजिर हरपल, हरघडी़। लज्जते दीद,
की, क्या करें बयां, एक झलक पाने केलिए, बेताब,
आशिक़ को दीद लगे ईद से पहले ईद़।

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Rita Duggal 16 AUG AT 21:46

दिल का नजराना, अनमोल, बेमोल कर, अदा शुक्रिया,
उस रब का जिसने दिल में जगा इश्क, दीवाना, बना,
संपूर्ण आत्मसमर्पण को विवश कर तेरा,सिर्फ तेरा ही,
बना दिया। रुह को सौंप,तुझे, शरीर को बेजान, दिल में,
बसा यादें, दुनिया को अपनी वीरान बना डाला। इश्क़,
को योग, और मुहब्बत को इबादत़, तुझे रब बनाडाला

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