रिंकू चेजारा   (रिंकू CHEJARA)
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मेरी भाषा की शक्ति कमज़ोर है,
मैं रीढ़ का पर्यायवाची स्त्री लिख देती हूं।✨
Joined 15 February 2021


मेरी भाषा की शक्ति कमज़ोर है,
मैं रीढ़ का पर्यायवाची स्त्री लिख देती हूं।✨
Joined 15 February 2021

लोग कहेंगे,, डूब जाओ पढ़ाई में,
लग्न लगाओ, सिर्फ़ पढ़ने में ध्यान दो,
आना जाना सब भूल जाओ।।
मगर, मैं कहूंगी कुछ अलग तुम्हें,,

बेशक पढ़ाई में मन लगाओ,
पर ख़ुद को ना खोते जाओ,
आनंद लो पढ़ाई का,
अपने मन और जीवन पर बोझ ना बढ़ाओ।
क्यूंकि थका –हारा, ऊबा हुआ,निढाल, बोझ तले दबा,
मायूस, उदास, ख़ामोश, नीरस सा अफ़सर,
किसी कुर्सी पर अच्छा नहीं लगता।।
अगर कुछ समझना है तो बस वक्त की क़ीमत समझो,
ईमानदारी दिखाओ और मेहनत करते जाओ।।।

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सब ओर पसरी तन्हाई है,
उदास सी है रात कितनी,
हर तरफ़ ख़ामोशी छाई है।

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जो मैं तुम्हारी हर बात मान लेती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या?
जो तुम कहते हो वो करती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या??
जो हर पल सिर्फ़ तुम्हें सोचती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या?
जो तुम्हारे पास रहने को बहाने करती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या??
जो तुम्हारी खुशी में खुश होती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या???
जो तुम रूठो तो तड़प उठती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या??
जो तुमसे बात करने को तरसती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या??
जो इश्क़ बारिश बन बरसती हूं,
ये मोहब्बत नहीं है क्या??

मुझमें सिर्फ़ तुम बसते हो,
मेरी हंसी में तुम हंसते हो।
मेरी नज़र में ये बेइंतहां मोहब्बत है,
बस तुम कहो,, ये मोहब्बत नहीं है क्या??

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हर किसी की मजबूरी है,
ना थके ना रुके जो धूप में भी,
श्रमिक सा श्रम ज़रूरी है।

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मुझे नहीं है तलाश किसी बेहतरीन की,
मुझे कोई बुरा भी मिले तो उसे बेहतर बना लूंगी।
मोहब्बत हो उसे मुझसे मगर इज़्ज़त ज्यादा करे,
वादा है हर हाल में साथ रहूंगी, भीड़ में भी गले लगा लूंगी।

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अच्छाई की भी कीमत चुकानी पड़ेगी,
ये ज़माना ऐसा है, अच्छा नहीं है यहां अच्छा होना।।

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मैं बयां नहीं कर पाती जज़्बात दिल के,
ख़ामोशी से मेरी उदासी पढ़ ले, कोई ऐसा शख़्स चाहिए।

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छुट्टियां सिर्फ़ मुलाजिमों की होती हैं,
जिम्मेदारियों के हिस्से इतवार नहीं आता।

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जानती हूं आसान नहीं होता पहली मोहब्बत को भूलना,
जिसके साथ इतना वक्त बिताया हो उससे दूर जाना बहुत मुश्किल होता है,
जिसे दिल के साथ साथ रूह में बसाया हो तो उसके बिना रहना नामुमकिन होता है,
जो हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा था उसके बिना एक पल भी दर्द देता है।।

मगर किसी ने नहीं कहा तुम्हें कि उसे दिल से निकालो,
किसी ने नहीं कहा कि तुम ख़ुद को संभालो,
रहो उसके एहसासों के साथ हमेशा,
उसकी यादों को ज़िंदगी बना लो।

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एक वक्त था जब तुम्हारी बेरूखी बहुत तड़पाती थी मुझे,
तुम्हारी नाराज़गी बड़ा सताती थी मुझे।

अब मुझे तुम्हारा किसी और से मिलना बुरा नहीं लगता,
अब तुम्हारा किसी और को देखना मुझे नहीं खटकता,
आदत हो गई अब मुझे तुम्हारे झूठे प्यार के बिना रहने की,
सच कहूं तो अब किसी बात से फ़र्क नहीं पड़ता।

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