8 AUG 2020 AT 19:36

याद न होगा तुमको अब कभी हम भी तुम्हारे थे
तुम्हारी पलकों के साए में गुजरते दिन हमारे थे
सुबह से शाम तक तुमको देखने की चाहत थी
आज हम दूर हैं तुमसे कभी तुम्हारे ही सहारे थे
मुकद्दर का खेल है ये बिछड़ कर जी रहे हैं हम
भूल सकते नहीं वो दिन जो संग हमने गुजारे थे
तुम्हारे चेहरे की मुस्कान यादों में अब भी ताजा है
उसी मुस्कान के जादू में हम अपने दिल को हारे थे

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