Rajnish Shrivastava  
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Joined 16 January 2018


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Joined 16 January 2018
YESTERDAY AT 13:41

मरा नहीं अब भी जिंदा है
उसके अनेक रुप नजर आते
वह हमारे बीच का बाशिंदा है
आओ अपने भीतर झांके
शायद कहीं नजर आ जाए
कोई दिखता नहीं जहाँ में
जो करता कभी अपनी निंदा है


वो कहीं नजर नहीं आते
इतने रावणों को देख कर
वह भी लगता है छुप जाते

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24 OCT AT 20:27

जीने का मजा ही अलग होता
हर ओर खुशी का माहौल दिखता
दिल तुम्हारे करीब आने को तड़पता
आंखो मे सुनहरे सपने सजा करते
हम तुम्हें अपने करीब महसूस करते
दिल इस तरह से मायूस न रहता
तुम्हारे ख्यालों में हर वक्त खोया रहता

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23 OCT AT 19:53

मानो तुझसे मिले हो न जैसे
तुझसे बिछड़ कर टूटे हैं ऐसे
खुद को भी जानते न हो जैसे

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19 OCT AT 20:01

चलो आज हम करीब आते हैं
एक दूसरे को गले से लगाते हैं
छूते हैं एक दूसरे के जख्मों को
आओ मरहम बन जाते हैं

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18 OCT AT 20:43

जरा सी देर में दुनिया में क्या से क्या हो जाता है
जहाँ पर बजनी थी शहनाई मातम छा जाता है
जिंदगी से खुशियाँ छिटक कर दूर चली जाती
गम का साया हमारे इर्दगिर्द हमेशा नजर आता है

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16 OCT AT 17:10

दुनिया की इस भीड़ में हर कोई परेशान है
हर चेहरे पर नजर आते चिंता के निशान हैं
लगा है हर कोई जिंदगी की जद्दोजहद में
सुकुन की तलाश में भटक रहा इंसान है
छोटा सा ये जीवन मगर भरमार हैं ख्वाहिशें
अरमान पूरे करने को देना पड़ता इम्तिहान है
चैन से चंद लम्हे गुजर जाए नसीब नहीं होता
मुसीबतों के जाल में फंसा हुआ इंसान है

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16 OCT AT 15:03

हम दोनों हैं ऐसे कि सदा लड़ते झगड़ते हैं
छोड़ कर एक दूजे को लेकिन रह न सकते हैं
हमें भी प्यार है उनसे उनको भी प्यार है हमसे
मगर इकरार करने से एक दूजे से बचते है
शिकवा है उन्हें हमसे मगर कुछ भी नहीं कहते
हम उनके दिल की बातों को समझकर चुप रहते हैं

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15 OCT AT 16:50

जब तक जहाँ में इंसान है
लड़ना है हर पल हालात से
हर शख्स इसी में परेशान है

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10 OCT AT 16:50

आवाज की खुशबू बिखेर कर चले गए
यादों का काफिला छोड़ कर चले गए

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9 OCT AT 17:41

जिंदगी यूँ गुजर गई ,अहसास भी न हो पाया
हम जूझते रहे उम्र भर , कुछ समझ नहीं आया
आभास भी न हुआ और शाम होने को आई
तलाश में रहे कुछ पाने की, हाथ में कुछ न आया
बचपन की यादें अब भी मन को सुकून देती हैं
खुशियों का वो दौर फिर लौट कर नहीं आया
उम्मीद का दामन पकड़े कदम रखा जवानी में
वो जाने कब निकल गई महसूस तक न हो पाया
अधूरी ख्वाहिशो का बोझ लादे अब जाएं भी कहां
जो मिला जैसा मिला उसी से मन को बहलाया

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