19 AUG 2020 AT 17:03

साहिल पर खड़े होकर उनसे नजर मिलाते रहे
वो हमसे दूर जाते हुए मंद मंद मुस्कराते रहे
आंसू उनकी आंखों से रुक रुक कर गिरते रहे
फिर भी वो आंसुओं को हमसे छुपाते रहे
हम देखते रहे उनको धीरे धीरे दूर होते हुए
महसूस करते रहे अपने दिल को तड़पते हुए
मुनासिब न था उनके चेहरे से नजर हटाना
क्या करते फिर भी पड़ा दिल को बहलाना
कठिन बहुत है प्रिय से बिछड़ कर जी पाना
घुट घुट के जीना और गम पीते चले जाना

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