पारखी अनुभवी नजर बदली मे छिपे चांद का दीदार कर जाती है दिल मे अगर चाहत हो तो बन्द ऑखे भी नजरे चार कर जाती है -
पारखी अनुभवी नजर बदली मे छिपे चांद का दीदार कर जाती है दिल मे अगर चाहत हो तो बन्द ऑखे भी नजरे चार कर जाती है
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