9 APR AT 14:50

कुछ मोड़ थे ऐसे भी जिनकी ओर हम न मुड़ पाए
सोचा उस ओर चल दें मगर साहस न बटोर पाए
काश मुड़े होते उस ओर तो हालात कुछ अलग होते
आज अब भी राह में हैं तब शायद मंजिल पर होते
मुकद्दर का खेल है सब ,व्यर्थ निराश क्यों हुआ जाए
बस हालात को चुनौती मान पूरी ताकत से लड़ा जाए

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