16 JUN AT 14:23

कभी आकर तो देखो मुरझाए फूल हो गए हम
खुशबू दूर हुई हमसे फूल से शूल हो गए हम
चाहत थी हंसते हंसते उम्र सारी गुजर जाए
सिमटकर गम के साए में खुद से दूर हो गए हम
सोचा था मिलेगी छांव तो चैन से दिन बिताएंगे
धूप में कट रहा जीवन तड़प कर रह गए हैं हम
उजालों की लेकर आस गुजारा वक्त अंधेरे में
अंधेरे अब लगे भाने अंधेरे में जीने लगे हैं हम

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