हम करीब आने की कोशिश सदा करते रहे
तुम फासले बनाकर दूर हमसे चलते रहे
यकीन था दिल में कभी तो समझोगे हमें
बस इसी आशा में हम आगे को बढ़ते रहे
तुम्हारे कदमों की आहट बेचैन हमें करती रही
हम तुम्हारा साथ पाने को पीछे पीछे चलते रहे
आरजू थी तुम हमें मुड़कर देखोगे कभी
तुम से मिलाने को नजर हर पल तरसते रहे
जाने कितना वक्त बीता मौसम आकर गए
दरिया की तरह हर हाल में हम आगे बढ़ते रहे
जीवन की उलझनों का हमने किया सामना
ठोकरें खाईं मगर उठकर हम चलते रहे
तुम्हारी चाहत का जादू इस कदर छाया रहा
टूटे मगर बिखरे नहीं राह में आगे को बढ़ते रहे
उम्र का लम्बा सफर गुजर गया इंतजार में
हम तुम्हारी एक नजर की चाह में भटकते रहे
छोड़ कर मैं जा रहा आज तेरे इस शहर से
जिस शहर में उम्र भर हम जीते और मरते रहे-
7 APR 2020 AT 23:22