21 JUL AT 20:39

एक मोड़ ऐसा भी आता है
जब कुछ समझ में न आता है
आगे को बढ़े या ठहर जाएं
सोचने में वक्त निकल जाता है
जिंदगी ठहरी सी जान पड़ती
जब राह में अंधेरा नजर आता है
बड़ी मुश्किल से कदम बढ़ते
इंसान चलने में लड़खड़ाता है
किससे पूछे आगे का रास्ता
कोई नजर भी न आता है
दिखता भी है अगर कोई तो
नजर बचाकर निकल जाता है
रिश्ते नाते सब पीछे छूट जाते
जब सच सामने आ जाता है
जिससे उम्मीद थी सहयोग की
वह कहीं नजर नहीं आता है
जब तक हम कुछ समझ पाएं
वक्त का कारवां निकल जाता है

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