16 APR 2020 AT 17:15

बीत गया जो उसे भुला दो
मन में आशा दीप जला लो
कितना भी बढ़ जाए अंधेरा
देर भले हो पर होगा सबेरा
झुकना नहीं मुश्किलों के आगे
कायर हैं वो सब जो इनसे भागे
मन में हो यदि पक्का इरादा
पूरी होती है हर अभिलाषा
सरिता बन तुम बहते जाओ
ज्ञान के सागर में मिल जाओ
आंधी में जो हैं दिया जलाते
औरों को है वही राह दिखाते
मन में नहीं निराशा लाओ
अपने कदम बढ़ाते जाओ
जो सफर पर निकल पड़े हैं
नहीं किसी से कभी डरे हैं
अपना कर्म तुम करते जाओ
जीवन पथ पर बढ़ते जाओ

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