8 APR 2020 AT 12:09

बिछड़ते वक्त वो चुपचाप रहे कुछ न बोल पाए थे
हम देखते रहे वो आंखों में आंसू लिए मुस्कराए थे
उनकी आंखो मे बिछड़ने का गम साफ झलक रहा था
चाहते थे बहुत कुछ कहना पर जुबां न खोल पाए थे
उनके चेहरे से पीड़ा का अहसास झलक रहा था
हम उनकी इस दशा को देख आंसू न रोक पाए थे
बड़ा कठिन था उस रोज उनको छोड़ कर निकलना
हम सारे रास्ते उनकी याद में आंसू बहाते आए थे
उनका वो मासूम और मुरझाया चेहरा हम न भूल पाए
जिस चेहरे को देख कर हम उम्र भर मुस्कराए थे

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