11 APR 2020 AT 11:20

अकेलापन जिंदगी में बड़ा तड़पाता है
वक्त आगे नहीं बढ़ता ठहर सा जाता है
उकताहट सी होने लगी है अकेलेपन से
भीड़ में भी इंसान खुद को अकेला पाता है
हसीन वादियों में भी महसूस होती ऊबन
तन्हा सफर जिंदगी का रह रहकर सताता है
दिल की बात कहे तब जब कोई नजर आए
हर सड़क और चौराहा सूना नजर आता है
मन का पंछी थक गया रहते चारदिवारी में
दूर गगन में उड़ने को ये पंछी फड़फड़ाता है
सुबह और शाम में अब अंतर समझ नहीं आता
जीवन की राह पर हर ओर अंधेरा नजर आता है
उजालों की तलाश में बढ़ रहे हैं कदम आहिस्ता
देखना है कब कोई जुगनू राह दिखाता है

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