Rajni Dhankhar Dangi   (Rajni Dhankhar Dangi)
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Joined 14 August 2020


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Joined 14 August 2020

जुगनुओं सी...
चमकती हैं...
खुशबुओं सी...
महकती हैं...
नहीं बुझती ...
कुछ उम्मीदें तेज...
आँधियों में भी।

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3 APR AT 11:58

लगें हैं पँख...
कुछ ख्वाबों को...
फिर से...
मत तोड़ो उन्हे...
खुले आकाश में...
अब उड़ जाने दो।

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20 MAR AT 7:20

टूटेंगे...
ये बंधन भी...
खुलेगी ...
बंद खिडक़ी भी...
बस थोड़ा ...
इँतजार और सही।

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11 MAR AT 10:16

मत बाँधो ...
मुझे इन ...
बंदिशों में...
खुली हवा में...
साँस लेने का ...
सलीका ...
अब सीख ...
लिया है मैंने।

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1 MAR AT 9:50

अधूरी ही ...
सही...
पर लिखी तो है...
एक मुक्कमल ...
दास्तान...
फिर से जीने की।

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22 FEB AT 12:54

दिन ...
नहीं ढलता...
कभी सूरज के...
ढलने से...
साँझ तो ...
होती है तब...
जब ढल ...
जाती है...
उम्मीद की लौ।

-


13 FEB AT 10:37

मिल जाए...
फुरसत अगर...
तो मुझे...
पढंना जरूर।
हर उलझी हुई...
पहेली का...
सुलझा हुआ...
जवाब हूँ मैं।

-


2 FEB AT 7:37

आसान ...
बहुत है...
खुशी में ...
मुस्कुरा देना।
मुस्कुरा दें...
जो गम में भी...
वो किरदार ही...
अलग होते हैं।

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18 JAN AT 21:14

करनी हैं पूरी...
अब हर वो...
अधूरी कहानी...
रास्ता जिनका कभी...
अँधेरों ने रोका था।

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10 JAN AT 8:57

यकीन होता है...
उन्हे खुद के...
फैसलों पर...
कुछ शख्स यूँ ही...
मिसाल नहीं बनते।

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