Rajni Dhankhar Dangi   (Rajni Dhankhar Dangi)
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Joined 14 August 2020


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Joined 14 August 2020
17 JUL AT 21:44

गुजर ही ...
जाते हैं...
वो लम्हे...
हक जिन...
पर हमारा ...
नहीं होता।

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26 JUN AT 21:23

ना उठती हैं कभी...
ना झुकती हैं कभी...
कुछ नजरें तो बस...
नजरों में झाँकती हैं।

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1 JUN AT 18:40

छोड़ दिया...
जब दामन...
हर सहारे ने मेरा...
उम्मीद की लौ...
इन आँखों में...
मैंने फिर भी...
जलाए रखी।

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13 MAY AT 7:18

गुजर...
जाती हूँ ...
देखकर ...
जिसे हर रोज,
मुलाकात की...
बारी अब उन...
आँखो के ...
सपनों से है।

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1 MAY AT 7:19

जीतना है अब...
उन अँधेरों को...
जो कदमों को मेरे...
जाने से रोकते हैं...
रोशनी की ओर।

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16 APR AT 20:50

जुगनुओं सी...
चमकती हैं...
खुशबुओं सी...
महकती हैं...
नहीं बुझती ...
कुछ उम्मीदें तेज...
आँधियों में भी।

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3 APR AT 11:58

लगें हैं पँख...
कुछ ख्वाबों को...
फिर से...
मत तोड़ो उन्हे...
खुले आकाश में...
अब उड़ जाने दो।

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20 MAR AT 7:20

टूटेंगे...
ये बंधन भी...
खुलेगी ...
बंद खिडक़ी भी...
बस थोड़ा ...
इँतजार और सही।

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11 MAR AT 10:16

मत बाँधो ...
मुझे इन ...
बंदिशों में...
खुली हवा में...
साँस लेने का ...
सलीका ...
अब सीख ...
लिया है मैंने।

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1 MAR AT 9:50

अधूरी ही ...
सही...
पर लिखी तो है...
एक मुक्कमल ...
दास्तान...
फिर से जीने की।

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