सुभाष की याद में...
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"खिल उठे सभी का रोम रोम, आंखें चमके ज्यों प्रखर सोम।
जब नाम लिया जाए "सुभाष", पाषाण हृदय बन जाए मोम।
मन में सबके उन्माद उठे, एक स्नेह भरा संवाद उठे।
आज़ाद हिन्द पुकारूं तो एकता का भयंकर नाद उठे।"
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(पूरी कविता अनुशीर्षक में...)- ©रजत द्विवेदी
23 JAN 2020 AT 6:52