Rajat Dwivedi   (©रजत द्विवेदी)
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Joined 16 November 2017


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Joined 16 November 2017
3 HOURS AGO

सब कुछ जानकार भी नकारने की।
हकीक़त से ख़ुद को दूर रखने की।
ख़्वाबों को यथार्थ मान लेने की।
अंजानों को अपना बना लेने की।
बेपरवाह से इश्क़ जताने की।

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9 HOURS AGO

तुझ में हम ऐसे उलझे
कि ख़ुद से भी दूर हो गए।
तेरी चाहतों में रह रह कर
जीने को मजबूर हो गए।
जीवन सहज था इश्क बिन
कोई अपेक्षाएं नहीं थीं।
मोहब्बत होते ही,
हम भी मगरूर हो गए।

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20 HOURS AGO

हम सीढ़ियां तो चढ़ते हैं,
मगर सीढ़ियों की कद्र करना नहीं जानते।
हमें इस बात का भ्रम है कि
सीढ़ियां पांव के नीचे से कभी नहीं खिसकेंगी।
हम इसी भ्रम पर आसमानों के ख्याल बुनते हैं।

मगर यह भ्रम ही हमें किसी रोज़
धक से नीचे गिरा देगा।
और ऊंचाइयों के स्वप्न देखने वाले हम,
इन्हीं सीढ़ियों पर भी नहीं टिक पाएंगे।

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YESTERDAY AT 14:01

जीवन का, प्रतीक्षा में सद्गति की।
प्रभु का नाम अधरों पर रखकर,
इंतज़ार करते हैं सब।
मृत्यु सहज ना मिलती किसी को,
चाहत सभी को मुक्ति की।

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YESTERDAY AT 7:49

कम होती जा रही है यदि नज़रों में।
हर किसी से तुम्हें खीज होती है यदि,
तो तुम समाज की हकीक़त जान चुके हो।
तो तुम लोगों का आडंबर पहचान चुके हो।
यह ग़लत नहीं कि तुम सब से दूर हो रहे हो।
सच ये है कि तुम ईश्वर के करीब आ रहे हो।

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30 NOV AT 15:00

भूख संग दम तोड़ देते हैं।
सड़क की रौनकें हीं आजकल
मन भर दिया करती हैं।
आंखों में आंसू तक नहीं टिकते,
उन्हीं से पेट भरा होता है।

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30 NOV AT 9:41

हर किसी को जकड़े हुए हैं।
दम घुटने लगता है थोथी बातों से।
कोई सदा सच्चाई की नहीं आती,
इस क़दर फिज़ा में ज़हर फ़ैला है।
रिवाजों का मज़ाक बनाकर रख दिया।
और थोप दिया है हर किसी की ज़िंदगी पर।

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29 NOV AT 21:59

कंचन काया पर मुग्ध आज,
हो रहा समग्र देवता समाज।
दीपों के तारक प्रज्वलित हुए।
नभ का अवनि पर बिम्ब दिखा।
धरती अल्कापुर जैसे चमके
गंगा तट पर शिव उतरे आज।

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29 NOV AT 10:03

खुले आसमान को एक टक निहारती है।
बन्द खिड़की अधूरे सपनों को पुकारती है।
बन्द खिड़की के पीछे से कोई आवाज़ सुनो,
किसी रोज़ झटके से खुल जाने को ये तैयार है।
किसी के ख्वाबों को पांख देने को ये तैयार है।
बशर्ते कोई शिद्दत से आसमां की ख्वाहिश करे।

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29 NOV AT 9:37

यह सांसों का संगीत।
गाते रहो, मुस्कुराते रहो।
दिल में प्रेम जगाते रहो।
औरों को अपनाओ तुम।
ख़ुद का मन बहलाते रहो।
जहां मिले जो भी जैसे भी
उसको गले लगाते रहो।

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