Rajat Dwivedi   (©रजत द्विवेदी)
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Joined 16 November 2017


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Joined 16 November 2017
AN HOUR AGO

मेरे दिल को भिंगो जाती हैं।
बंजर मन की धरती पर,
भावों की बरखा लाती है।
मैं पांव से लेकर सर तक
इस क़दर डूबने लगता हूं।
जाने कौन सी बिछुड़न है
जो हमको तड़पाती है।
तुम पास नहीं हो तो तुम्हारी
परछाईं हमें सताती है।

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2 HOURS AGO

इस तरह जैसे पाया है मैंने।
सुख, दुःख, हंसी, उदासी सबको
बेबाक अपनाया है मैंने।
मुझे चाह ना खुशी की थी कभी
और न रहा दुःख का उद्गार।
ना अभिलाषा या उम्मीदें
ना दिल में कुछ दुख का ज्वार।
फिर भी सब कुछ सहन कर लिया
जो जैसा भी आया, मैंने।
बिना संकोच के जीना सीखा
हर एक हाल जो पाया मैंने।

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17 HOURS AGO

जिनने झुककर इशारे से
दिल में सहसा दस्तक दे दी।
और हमको अपना बना लिया।
नैनों में हमको छिपा लिया।
स्वासों में स्पंदन जगा दिया।
धड़कन को यूं ही बढ़ा दिया।
अब हम कैसे जी पायेंगे?
बेचैनी कैसे सह पायेंगे?
उनसे मिलना अब ज़रूरी है,
भले मीलों तक की दूरी है।
बिन मिले न अब रह पायेंगे।
अब तो या विरह मिटायेंगे।

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YESTERDAY AT 8:54

हमने ख़ुद को आप के लिए बचाकर रखा था।
इसी जतन में ज़िंदगी के हाथों रोज़ खर्च हो रहे थे।
अब मौका मिला है फिर से संवरने का,
मुझे थामकर मुझे फिर से संचित कर लो।

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30 JUN AT 21:36

तुम्हें परेशान देखकर दिल धक से सहम जाता है।
तुम कब इतने ख़ास हो गए, हमें कुछ ख़बर ही नहीं।

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29 JUN AT 9:27

उम्र ढल रही हो जब,
और सहारे छूट रहे हों।
तब ज़िंदगी जो है
मौत से भी भयावह लगती है।
क्षण क्षण अकेलेपन में गुज़रता है,
और विश्वास की इमारतें ढह जाती हैं।

ऐसे में किसी का बस यूं ही हांथ थाम लेना,
भर देता है मनुज को भीषण स्नेह से।

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28 JUN AT 8:38

जो कई बार की है हमने।
मगर संजीदगी का एहसास,
तुम्हारे संग होने पर ही आया है।
हम बहुत मचले हैं अब तक
क्षणभंगुर प्रेम के उन्माद से।
मगर अथाह प्रेम का सागर
हमने तुमसे ही पाया है।

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27 JUN AT 17:33

यह सच की अभी कुछ समय तक,
हम परखे जायेंगे अपनी शिद्दत के लिए।
हम परखे जायेंगे हर दिन एक दूसरे के लिए।
हम परखे जायेंगे अपने अपने विश्वास के लिए।
कई बार टूटेंगे, कई बार बिखरेंगे।
ज़हन में कई बार भ्रम पनपेगा।

मगर वह पहली बार की मुलाकात।
एक दम से जो उभर आया था प्यार।
ये बेचैनी जो बेइंतेहा हम पर मयस्सर है,
किसी भी हाल में हमें एक दूसरे से जुदा होने ना देंगी।
हमारे दिल जो जुड़े हैं, अब कभी दूर न हो पायेंगे।

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27 JUN AT 17:22

मेरे और तुम्हारे अंदर जो तूफान है इंतज़ार का,
कहीं एक झटके हमें एक दूसरे से दूर ना कर दे।
आओ कसकर थाम लो हांथ मेरा,
कि अभी बड़ी दूर तक चलते जाना है।

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27 JUN AT 8:42

राजा राम, अवध जन वासा। जहां प्रगट भए प्रेम प्रकासा।
सरजू अलौकिक तीरथराजा। जहां मंगल प्रमोद सब साजा।
सृष्टि ताप हरन कै कारण। धरे देहु, अवतरेऊ नारायण।
रूप, रंग, स्वभाव कै खानी। राम कृपानिधि अन्तरजामी।
जुग जुग सबहीं मंगल करनी। महाप्रभु भवचाप सब हरनी।
आए आज जब अवध समाजा। मन विनोद अति सुंदर पावा।
देखब छवि रघुपति सीता की। मन पावन हो ज्यों गीता सी।
मोर मनोरथ सकल सच होहू। राम सिया करि मो पर छोहू।

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