Rajat Dwivedi   (©रजत द्विवेदी)
3.2k Followers · 192 Following

read more
Joined 16 November 2017


read more
Joined 16 November 2017
5 HOURS AGO

सहारे एक दूजे के हुए जो तो चट्टानों से टकरायेंगे।
एकल जो लड़ते रहे तो यूं ही बिखर जायेंगे।
इत्तेहाद से ही बनती है कोई भी कहानी फतेह की।
अलगाव गर रहा तो कहां कुछ कर पायेंगे।

-


13 HOURS AGO

जीने की अभिलाषा।
चाहतों का कारण,
इच्छाओं की परिभाषा।
जीवन बंधा है
कितनी बेड़ियों में।
उन्मुक्त मन की मगर
अजब सी है भाषा।

-


17 HOURS AGO

तेरी यादों की झिलमिल।
तू ज़िंदगी का हासिल।
तू मेरी चाहतों का कामिल।
तू मेरे वजूद को पहचान।
तू ही आख़िरी मंज़िल।

-


17 SEP AT 21:50

कोई ख़ामोशी इतनी बेज़ार लगती है,
जैसे कितनी उदासियां मन में सहेज रखी हों,
मगर लब से उफ़ तक ना करने की ठानी है।
भावनाएं कुछ इस तरह से ख़त्म हो गई हैं,
कि शायद अब चुप रहना ही आदत बन गई है।

-


17 SEP AT 8:51

जीवन में मुस्कुराना सीख।
बेवजह ही धूप सा तू खिल जाना सीख।
खो गया जो रात कल था, भूल जा उसे।
आज जो हासिल उसी से दिल लगाना सीख।

-


16 SEP AT 23:44

हम एक पूरे ब्रह्मांड को ख़ुद में समेटे हुए हैं।
मगर हमें इसका तनिक भी ज्ञान नहीं।
फ़िर कैसे हम उस परमात्मा पर प्रश्नचिह्न लगा दें,
जिसके स्वरूप तक का भी हमें अनुमान नहीं?

-


16 SEP AT 15:12

किसी वजह की ज़रूरत नहीं मुझे।
तुम अकारण ही मेरे दिल के करीब हो।
तुमसे कुछ कहूं या चाहे ना कहूं,
मुझे मालूम है कि तुम ही मेरा नसीब हो।

-


16 SEP AT 12:57

आसमान से भी आगे।
बेहद, बेपरवाह, बेलौस।
जिससे कोई भी अछूता नहीं।
हर किसी के मन में उठती है
हज़ारों ख्वाहिशें जीने की।

-


16 SEP AT 7:58

कस्तूरी मन में बसे जग भटकन की चाह।
देखे ना निज में कभी, ढूंढ़े देव कहां!
जो घट घट में वास करे बनकर स्वास समीर।
वो नारायण खोज रहा द्वार द्वार ले पीर।

-


15 SEP AT 10:06

जाने कितना कुछ कहना है।
जाने कितना कुछ सुनना है।
तुम्हें अपना बनाना है।
तुम से प्रीत निभाना है।
तुम्हें अपना सब कुछ मान,
तुम संग जीवन बिताना है।

-


Fetching Rajat Dwivedi Quotes