कातिब ये लिखे अब कहानी कौन सी?
अब बची है भला इश्क़ की निशानी कौन सी?
अब बची है चिंगारी कौन सी इंकलाब की?
सूरत बदलती दिख रही है चिराग़ की।
उठी नहीं अब तक एक भी आग जिस्म में,
ना इश्क़ गहरा हुआ, ना हम ही डूबे उसमें।
ना वजूद को ठेस लगी, ना दिल पर बात आई,
जाने बगावत की हारी हुई कौन सी बिसात आई?
कातिब किसकी लिखे जिंदगानी कौन सी?
फ़ैज़ की या लिखे भगत की कहानी कौन सी?
ना कलम को पता, ना कातिब को इल्म है,
स्याह उड़ेल कर छोड़नी है काग़ज़ पर निशानी कौन सी?- ©रजत द्विवेदी
23 APR 2019 AT 22:52