अंधेरे के थैले में थोड़ी सी रोशनी जादू है।— % &
-
कलाकार
रचनाकार
'No' अहंकार 😉😉
जल्द ही 'परियोजना- प्रबन्धकार (प्रबन्धक)
ठीक है तू????
ना जाने क्यूं आज तुझे सपनों में देख लिया,
कभी दोस्ती थी हमारी उसी के बहाने से पूछ लिया।
रोका बहुत की फिर से ना परेशान करूं तुझे,
जो देखा सपने में, उसने मजबूर कर दीया।
-
आप ने तो कुछ सोचा ही नहीं,
और हम दुनिया बसा बैठे हैं।
अपनी अच्छाई पर,
खुद ही रो बैठे हैं।-
एक रोज़,
मुलाकात तो जरूर होगी,
भीगेंगी पलकें,
झुकेंगी नजरें,
धड़कने तेज़ तो जरूर होंगी,
नजरें टकराएंगी,
बिखर जाएंगी सारी यादें,
एक-एक पल का हिसाब मांगती हुई,
चीखें गूंजें की जरूर,
सुन सको तो सुन लेना,
एक बात का जवाब जरूर देना,
क्या में अब भी याद आती हूं?
-
कितनी हसीन होती है ये रातें,
दूर बैठे चांद सितारे पास होते है,
पास होता है हर एक वो सक्स,
जो सुबह होते ही कोसों दूर हो जाता है ।
कितनी रंगीन होती है ये रातें
भरे अंधेरे में भी सत रंगी सपने दिखाती है,
फिर इस रंगीन दुनिया को,
एक रंग में ही समेट लेती है।
-
रह रह कर रात को ये दिल मेरा जलता है,
होती है खामोशी मगर ये कुछ कहता है,
रोज चांद से शिकायत करता है,
सुबह होते ही कहीं खो जाता है,
-
सुना है,
आने के भी दो सलीके हैं,
खुद से आते तो,
ठहरने को आते।
बुलाने से आते तो,
जाने को आते।-
उसने रोड पार करना सिखाया,
थाम के मेरा हाथ चलना बताया,
एक रोज़,
रोड के उस पार जाना था,
लगातार गाड़ियों का आना जाना था,
रहती थी हिम्मत के तुम हो,
पर अब तुम मिलों कहीं दूर हो,
उठाया बस्ता,समेटा खुद को,
छोड़ पीछे यादों का पिटारा,
पलट के ना देखा उसको दुबारा,
ना जाने कब रोड के इसपार आ गई,
था आसान, अब जान गई।
-
अच्छा किया जो तुम चले गए,
इस बदलती दुनिया का रंग दिखा गए,
अलग हि सपने संजोए थे हमने,
अलग हि रास्ता चुन लिया था,
अच्छा हुआ कि तुमने पलट के भी न देखा,
मेरी कमजोर होती हुई सांसे,
लड़खड़ाती चाल, टिम टिमाती आंखे,
और बिखरा हुआ हमारा संसार,
जो तुझसे ही था,
मेरे इस भ्रम को तोड़ गए,
अच्छा हि किया की तुम चले गए।
-
तलब ये नहीं की मैं लिखुं, तुम पढ़ो
ख्वाइश ये है कि मैं कहूँ, तुम सुनो।-