Rajani Shakya   (रजनी)
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वास्तुकार
कलाकार
रचनाकार
'No' अहंकार 😉😉
जल्द ही 'परियोजना- प्रबन्धकार (प्रबन्धक)
Joined 6 October 2018


वास्तुकार
कलाकार
रचनाकार
'No' अहंकार 😉😉
जल्द ही 'परियोजना- प्रबन्धकार (प्रबन्धक)
Joined 6 October 2018
31 JAN 2022 AT 23:57

अंधेरे के थैले में थोड़ी सी रोशनी जादू है।— % &

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10 JAN 2022 AT 22:54

ठीक है तू????

ना जाने क्यूं आज तुझे सपनों में देख लिया,
कभी दोस्ती थी हमारी उसी के बहाने से पूछ लिया।
रोका बहुत की फिर से ना परेशान करूं तुझे,
जो देखा सपने में, उसने मजबूर कर दीया।

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10 JAN 2022 AT 22:25

आप ने तो कुछ सोचा ही नहीं,
और हम दुनिया बसा बैठे हैं।
अपनी अच्छाई पर,
खुद ही रो बैठे हैं।

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5 JUL 2021 AT 0:57

एक रोज़,
मुलाकात तो जरूर होगी,
भीगेंगी पलकें,
झुकेंगी नजरें,
धड़कने तेज़ तो जरूर होंगी,
नजरें टकराएंगी,
बिखर जाएंगी सारी यादें,
एक-एक पल का हिसाब मांगती हुई,
चीखें गूंजें की जरूर,
सुन सको तो सुन लेना,
एक बात का जवाब जरूर देना,
क्या में अब भी याद आती हूं?

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5 JUL 2021 AT 0:35

कितनी हसीन होती है ये रातें,
दूर बैठे चांद सितारे पास होते है,
पास होता है हर एक वो सक्स,
जो सुबह होते ही कोसों दूर हो जाता है ।

कितनी रंगीन होती है ये रातें
भरे अंधेरे में भी सत रंगी सपने दिखाती है,
फिर इस रंगीन दुनिया को,
एक रंग में ही समेट लेती है।




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5 JUL 2021 AT 0:01

रह रह कर रात को ये दिल मेरा जलता है,
होती है खामोशी मगर ये कुछ कहता है,
रोज चांद से शिकायत करता है,
सुबह होते ही कहीं खो जाता है,


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2 JUL 2021 AT 12:08

सुना है,
आने के भी दो सलीके हैं,
खुद से आते तो,
ठहरने को आते।
बुलाने से आते तो,
जाने को आते।

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2 JUL 2021 AT 11:44

उसने रोड पार करना सिखाया,
थाम के मेरा हाथ चलना बताया,
एक रोज़,
रोड के उस पार जाना था,
लगातार गाड़ियों का आना जाना था,
रहती थी हिम्मत के तुम हो,
पर अब तुम मिलों कहीं दूर हो,
उठाया बस्ता,समेटा खुद को,
छोड़ पीछे यादों का पिटारा,
पलट के ना देखा उसको दुबारा,
ना जाने कब रोड के इसपार आ गई,
था आसान, अब जान गई।


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2 JUL 2021 AT 4:11

अच्छा किया जो तुम चले गए,
इस बदलती दुनिया का रंग दिखा गए,
अलग हि सपने संजोए थे हमने,
अलग हि रास्ता चुन लिया था,
अच्छा हुआ कि तुमने पलट के भी न देखा,
मेरी कमजोर होती हुई सांसे,
लड़खड़ाती चाल, टिम टिमाती आंखे,
और बिखरा हुआ हमारा संसार,
जो तुझसे ही था,
मेरे इस भ्रम को तोड़ गए,
अच्छा हि किया की तुम चले गए।

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2 JUL 2021 AT 3:13

तलब ये नहीं की मैं लिखुं, तुम पढ़ो
ख्वाइश ये है कि मैं कहूँ, तुम सुनो।

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