Raj Dubey   (Raj Dubey)
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Joined 22 December 2017


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Joined 22 December 2017
21 JAN AT 22:13

पहेली सी इस ज़िंदगी में तुम मेरे लिए हमेशा ही सरल बनते रहे। कभी-कभी मैं सोचती हूं, कोई इतना सरल कैसे हो सकता है किसी के लिए!.. हां ये अलग बात है कि तुम दिखाते हो कि तुम ऐसे नहीं हो,..पर मेरे लिए तुम इतने सरल होते हो जितना किसी परेशान, हताश और सिरदर्द से पीड़ित इंसान के लिए एक कप अदरक की चाय, जिसकी हर घूंट के साथ उसका दर्द कम हो जाता है, ठीक वैसे ही तुम्हारी हर बात के साथ मेरी परेशानियां, मेरी उलझनें कम होने लगती हैं,...पता है तुम्हें तुम मेरे लिए उतने सरल हो जाते हो जितना किसी आँखों से कमजोर इंसान के लिए एक चश्मा, जिसे पहनकर वो धुंधली दिखती राहों को साफ़-साफ़ देख पाता है, ठीक वैसे ही तुम मुझे हर वो राह साफ़-साफ़ दिखाते हो जिसे मैं अपने मन के भीतर चल रहे द्वंद के कारण देख नहीं पाती!.. सुनों!.. तुम हमेशा ही बने रहना मेरे लिए इतना ही सरल,..
बिल्कुल उस चाय और चश्में की तरह!❤️

Dedicated to Mr. Dubey ji 😍❤️

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20 JAN AT 12:25

अनंत के उस पार जब एक दिन आएगा, जिसदिन मैं अपनी सारी जिंदगी समेट रहा होऊंगा,तब उसदिन मैं एक खत लिखूँगा। मैं लिखूंगा कि टूटना क्यों जरूरी है, टूटकर बिखर जाना क्या होता है, क्या महसूस होता है जब हम अकेले होते हैं,अंधकार का पसंद आ जाना क्या होता है। मैं लिखूंगा कि समय के साथ चीजें कैसी बिगड़ती हैं, कैसे हम उन चीजों को संभाल नहीं पाते, और कैसे देखते ही देखते समय हमारे हाथ मे नहीं रह जाता, क्यों एक न एक दिन सब ठीक हो जाता है, क्यों समय हर एक जख्म को भर देता है और क्यों समय खुदके बीतने पर एक गहरा दाग छोड़ देता है और क्यों वो दाग ताउम्र रह जाता है।

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20 JAN AT 12:18

मैं लिखूंगा कि कैसे घर परिवार से दूर कुछ लोग किसी के खास बन जाते हैं, कैसे कल के मिले अनजान लोग वक्त से साथ खुदमे ऐसे मिल जाते हैं कि हर पल खुदको जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, कैसे समय के एक चक्र में वो हमारे सबसे करीबी होते है, लेकिन मैं ये भी लिखूंगा कि जाना ज़िंदगी की सबसे खौफनाक क्रिया कैसे है, कैसे एक लंबे अरसे तक साथ रहने वाले लोग एक न एकदिन चले जाते हैं, चीजें क्यों बिगड़ जाती हैं, क्यों सबकुछ सही नही किया जा सकता और क्यों कभी कभी बिछड़ जाना ही ज़िंदा रहने का आखिरी विकल्प बच जाता है।मैं लिखूंगा उन तमाम लोगों के बारे में, जो कभी समय के साथ नही बदले ! मैं लिखूंगा कि रिश्ते बनते कैसे हैं, रिश्तों के मायने क्या होते हैं, क्यों हमे जोड़े रखने की सबसे बड़ी वजह रिश्ते हैं और क्यों कुछ रिश्तों को कभी नाम नहीं दिया जाना चाहिए।मैं लिखूंगा अपनी उन तमाम रातों के बारे में, जब मन मे सिर्फ और सिर्फ सवाल थे, जब पढ़ाई के सवालों से ज्यादा कठिन वो सवाल लगे थे जो ज़िन्दगी ने पूछे थे। मैं लिखूंगा उन स्याह रातों में खुदको ज़िंदा रख पाने के जद्दोजहद की वो तमाम कहानियां और मैं मोल लिखूंगा अपने आंसूओ के एक एक बूंद का, जिनका गवाह कोई भी नही।

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18 DEC 2022 AT 11:27

मुझे अगर समझ पाते ,
मुझसे बेहतर दोस्त की तालाश न करते।

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4 DEC 2022 AT 10:47

हाँ!! में ब्राह्मण हूँ !!
निश्चल हूँ, निष्पक्ष हूँ, निष्पाप हूँ;
कमजोर इतना हूँ कि सबको माफ कर देता हूँ ।
लालची इतना हूँ कि चन्द्रगुप्त को राजा बना देता हूँ ।
डरपोक हूँ, इसलिए तो पृथ्वी को इक्कीस बार अत्याचारियों से मुक्त करता हूं ।
अनुपयोगी भी हूँ, तभी तो हड्डियों से वर्ज बनवाता हूँ ।
अनपढ हूँ, क्योंकि व्याकरण और गणित को खोज कर लाता हूँ ।
जातिवादी हूँ,
माया,मुलायम,कांग्रेस,भाजपा..... पता नहीं कितनो के साथ हूँ ।
आरक्षण का विरोध नहीं करता, क्यूंकि अपनों के नाराज होने का है।
सरकार से कुछ नहीं मांगता, क्यूंकि हिन्दूस्तान कमजोर होने का डर है ।
बंगलादेश, पाकिस्तान से गायब हूँ, काश्मीर से निष्कासित हूँ ।
फिर भी अखंड भारत का स्वपन देखता हूँ ।
कदम कदम पर ठगा जाता हूँ, फिर भी "सर्वे भवंतु सुखिनः" का मंत्र गुनगुनाता हूँ ।।
क्योंकि ..... मैं ब्राह्मण हूँ ।।
JNU की दीवारों पर लिखे ब्राह्मण विरोधी नारे ।।
#Expose_Intellectual_terrorism

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1 SEP 2022 AT 20:40

घंटो की आवाज से यहां सवेरा है
धाटों पर साधु संतों का बसेरा है।
यहाँ के लोगों का अलग ही व्यवहार है
अनजानों से भी दोस्तों जैसा प्यार है।
कितना कुछ लिख दू बनारस के प्यार में
कम पड़ जाते  है शब्द इसके बखान में।

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1 SEP 2022 AT 20:37

आ तुझे बनारसी इश्क़ की एक साम दिखाऊं,
एक कड़क चाय और एक मीठा पान खिलाऊं।

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1 SEP 2022 AT 20:36

कैसे कोई किस्सा लिख दू…

बनारस तो अनंत कहानी है,

हम भी बनारस के है गुरु

हमारी खुद कई कहानी है।

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27 JUN 2022 AT 14:00

बचपन मे हमारे बहुत दोस्त होते है हम भी अपनी जवानी के शुरुआती दिनों में किसी को कुछ नही समझते है क्योंकि चाहने वाले ही इतने होते है तब ज्यादातर दोस्तो में समझ होती नही तो वो बस हँसी खुशी ज़िन्दगी जीते रहते फिर धीरे धीरे दोस्तो में समझ आने लगती और भविष्य की चिंता की वजह से वो खुदको अपने तक समेट लेते और जो प्यार जिसे हम अपना सब मानकर बैठ जाते है और जवानी का कीमती समय उसे देते है वो भी ज्यादा दिनों तक साथ रहने पर धीरे धीरे अलग होने लग जाता है कोई वजह शादी का नही होना बताता तो कोई प्यार से मन भर जाना तो कोई कैरियर पर फोकस करने की वजह बताता एक उम्र के आते आते असली नकली सब लोग लगभग किनारे होने लगते कुछ ही होते है जो साथ देते है । जिस उम्र में हमे सच मे दोस्तो की जरूरत होती उस उम्र में हम अक्सर अकेले ही होते है । इतने सालों के बाद हम एक ऐसा इंसान भी नही कमा पाते जो हमारे सुख दुख में साथ रहे । हम कभी low हो तो हमे दिलासा दे सके हम कभी खुश हो तो उसके साथ खुशी शेयर कर सके । ऑनलाईन दोस्त बहुत है पर असल मे दोस्त कोई नही होता ।

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9 JUN 2022 AT 20:30

हम कोई नया गाना सुनते हैं और वो हमें अच्छा लग जाता है । फिर हम उसे रोज़ सुनते हैं ,लगातार सुनते हैं , बार बार सुनते हैं । कितना मज़ा आ रहा होता है । फिर कुछ दिनों बाद वो गाना कम अच्छा लगने लगता है । हम उसे सुनना कम कर देते हैं , फिर एक दिन अचानक उसकी जगह खत्म हो जाती हैं , उसको हम सुनना छोड़ देते हैं और उसकी जगह कोई और गाना ले लेता है । फिर कई सालों बाद अचानक कहीं से सुन लेते हैं तो फिर से सुनने का मन करता है । और फिर से याद आता है कि वो गाना कितना सही था । ना ना हम ये नहीं बोलते कि गाना सही था । हम बोलते हैं ये गाना कितना सही है । है । रिश्ते भी ऐसे ही होते हैं । कभी कोई कम अच्छा लगने लगे , तो रिश्ता खत्म होने से पहले ही कुछ दिनों के लिए दूरी बना लेनी चाहिए । दूरी रहती है तो प्यार बरकरार रहता है ।

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