Raj Bairwa   (© मुसाफ़िर)
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Joined 30 January 2017


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43 MINUTES AGO

" ज़िन्दगी untold - १८ ..... "

जब कोई तुम्हें ,
तुम्हारी सारी कमियों के साथ
अपना ले,
तो समझ जाना कि
इस दुनिया मे
उससे ज्यादा खूबसूरत
कोई और इंसान नही....!!

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23 HOURS AGO

" आख़िर क्यों..... "
मैंने प्रेम को जानने से पहले तुम्हें जाना था,
उसे पहचानने से पहले तुम्हें पहचाना था,

तो फिर ये कैसे मान लूँ मैं, की प्रेमियों का मिलना मिथ्या है,
मिथ्या ही है ये मानूं क्यों,
स्वयं को औरों की नज़रों से पहचानूँ क्यों,
समझ ना आये उसको मानना भी तो हत्या है,
इस हत्या को हक़ सा आखिर जानूं क्यों,
कुछ तुमनें कहा कुछ हमनें सुना,
इस बात को ही सच मे मानूं क्यों,
ये सब उलझी बातों से, घनी अँधेरी रातों से,
वो धुँधला सच क्या साफ हुआ है,
जो झूठ तले मारा तुमनें,
उसके कब और कैसे हिसाब हुआ है,

इतना खोकर भी पाया क्या,
जो ढूंढना चाहा वो नज़र आया क्या,
उस पर निकले गए वो उनको जाने दो,
तुम ठहरो यहीं पर, और सब कुछ ढह जाने दो....!!

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16 JAN AT 20:31

" बस एक नाम...... "

मेरे लफ़्ज़ों से
मालूम नही
किसको आराम आया,

दस्तियाब तो थी
रूह मिरी हर हिस्से में
लेकिन,

आख़िर में सभी के हिस्से
बस एक नाम आया...!!

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14 JAN AT 23:51

" अकेली रात...... "

ये अकेली रात और चंद सितारे,
बिन तेरे है अधूरे सारे,
हुई बात पुरानी तो निकल आये,
बरसों पुराने अश्क़ हमारे....!!

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9 JAN AT 20:59

" आराम ढूंढ़ता है..... "
जिस्म थककर सिर्फ़ आराम ढूंढ़ता है,
सुकून के दो छोर के बीच एक नाम ढूंढ़ता है,
कभी ज़ख्म खरोंच कर ज़िंदा कर लेता है ख़ुद को,
तो कभी मौत में हर मुश्किल का अंजाम ढूंढ़ता है,
जिस्म थककर सिर्फ़ आराम ढूंढ़ता है...!!

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7 JAN AT 8:13

" मौज़ूदगी..... "

पानी कम हो गया है अब समंदरों में,
इन्होंने आँखों में घर कर लिया है शायद...!!

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6 JAN AT 9:36

" हर दौर में प्रेमी..... "
हर दौर में प्रेम से ज्यादा
प्रेमी ठुकराये गए हैं,
और वो तमाम धोखे,
समाज के ज़ख्म बताये गए है,
झूठ है वो भी
जो तुम्हें सच की तरह दिखाये गए है,
कभी तस्वीरों में
कभी कागज़ों में
दर्द सदियों तक छिपाये गए है,
हर दौर में प्रेम से ज्यादा
प्रेमी ठुकराये गए हैं...!!

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3 JAN AT 20:50

" सड़ा गला सिस्टम.... "

है गुनाह के कई चेहरे
मगर क़ैद में एक ही गुनहगार है,
चमचों की फ़ौज पर मौज़ उड़ाते
ये शिक्षा के बाज़ार हैं,
फाइलों के सारे खेल है,
पैसों पर चलती रेल है,
क़ाबिलयत से भी ऊपर रखा
अपनी सहूलियत को आधार है...!!

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2 JAN AT 21:01

" ज़िन्दगी untold- १७...... "

जो लोग दूसरों के ग़म में सुकून ढूंढ ले,
उनसे ज्यादा बर्बाद ज़िन्दगी किसी की यक़ीनन मुमक़िन नहीं...!!

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1 JAN AT 21:13

" उलझनें..... "
मिटा देते है वो लिखकर अपने कई सारे जवाब,
उन सवालों के, जो कभी ख़ुद से पूछें नही गए...!!

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