Raj Bairwa   (© मुसाफ़िर)
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Joined 30 January 2017


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24 SEP AT 23:53

" ना जाने कितनी कोशिशें....."
सफलता की अंधी दौड़ में ,ना जाने कितनी कोशिशें हार जाती है,
आरंभ और अंत के विस्तार के बीच सब कुछ अपना गंवा जाती है,
थकित मन को ढ़ोते ढ़ोते हर परिश्रम को झुठला जाती है,
फिर एक दिन इनसे विस्मित होकर ये दुनियां इनको भूला जाती है,
सफलता की अंधी दौड़ में ,ना जाने कितनी कोशिशें हार जाती है...!!

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23 SEP AT 21:31

" ज़िन्दगी untold - 9.... "
किसी एक ऐसे व्यक्ति का आपके जीवन मे होना,
जो हर तरह से आपकी सीमाओं से परे हो,
आपकों और आपके जीवन को,
कई अनोखे रोमांच और नए अर्थ प्रदान करता है....!!

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22 SEP AT 19:47

" एक भटकी रूह..... "
मैं ख़ामोशियों को तलाशते हुए तुम तक पहुँचा था,
और तुमनें ख़ुशियों से मेरा तआरुफ़ करा दिया,
मालूम नही मुझकों कहाँ और कैसे मिलेगा,
वो सुकून जिसकी ख़ातिर अपना सबकुछ गँवा दिया...!!

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13 SEP AT 21:06

" तुम्हारी तरफ.... "

कभी लाखों तारों में समेटना चाहता हूँ,
कभी किसी पल में तुम्हें कागज़ पर उकेरना चाहता हूँ,
ठहर गया हूँ कहीं मैं शायद ,
जहाँ से ख़ुद को तुम्हारी तरफ धकेलना चाहता हूँ....!!

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11 SEP AT 20:54

" तुम्हें रोज़ देखा जायेगा..... "

तुम्हें हर तरह से रोज़ आज़मा कर देखा जायेगा,
हिम्मत को तुम्हारी यूँ तोड़कर डराकर देखा जायेगा,
तुम रुकना मत बस चलते रहना दोस्त,
तुम्हें धोखों की बारिश में भी नहलाकर देखा जायेगा,
गर उठने भी लगे सवाल तुम्हारे सफ़र पर कभी,
तब भी तुम्हें ग़लत बता कर मंजिलों से भटकाकर देखा जायेगा,

यक़ीन रखना होगा तुम्हें अपनी सच्चाई पर हमेशा,
क्योंकि हर दफ़ा तुमसे दुनियां का सच छुपाया जायेगा,
नक़ाब तो झूठ के होते है,
शर्म और लिहाज़ के नाम पर मगर तुम्हें,
सबसे झूठा और बेशर्म बताया जायेगा,
ये दुनियां है यहाँ दुनियादारी है मेरे दोस्त इसलिए,
भीड़ से अलहदा चलकर ही ये सब बदला जायेगा....!!

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11 SEP AT 8:57

" उम्मीदों की गठरी..... "
किसी नदी के दोनों विपरीत छोरों के,
आपस मे मिल जाने की कल्पना कितनी मासूम सी लगती है,
जैसे किसी बच्चे ने कटोरी से चाँद पकड़ना चाहा हो,

एक सूखे वृक्ष पर आख़िरी बची पत्ती से उस वृक्ष के,
पुनर्जन्म की इच्छा कितनी निर्दयी लगती है,
ठीक वैसे ही जैसे किसी बूढ़े मनुष्य को फिर से,
वर्षों तक इस संवेदनहीन समाज में जीवित रहने के लिए छोड़ देना,

कागज़ की नाव से किसी समंदर को पार कर लेने की उम्मीद कर लेना,
बिल्कुल वैसे ही है जैसे सिग्नल पर करतब करते
छोटे बच्चे से स्कूल में पढ़ने को कहना,

मैं भी इसी तरह कई उम्मीदों की गठरियां लिए
निरंतर चलता रहता हूँ, सिर्फ उस एक दिन के लिए
उस एक शहर के लिए, जहाँ मैं वो गठरी खोलकर
उन उम्मीदों को हक़ीक़त में बदल सकूँ....!!

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8 SEP AT 21:29

" मेरा निशान..... "

दिन रात के हिसाब में उलझा कोई अपना वहाँ है,
जहाँ तक देखती है नज़रें वो दिखता कहाँ है,

पानी पर लिखकर भुलाया है उसने भी मुझें कई दफ़ा,
साहिलों पर उसके मगर अब भी मेरा निशान वहाँ है,

दिन रात के हिसाब में उलझा कोई अपना वहाँ है...!!

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6 SEP AT 23:03

" तू मुस्कुरा..... "

तू मुस्कुरा कर जी ज़िन्दगी, के तुझें देख रूह हस्ती है,
वक़्त की अपनी मुश्किलें है मगर खुशियों की भी एक बस्ती है,

तू रहना मत गुमसुम चाहें औरों को तू खटकती है,
तू ख़ुद ही ख़ुद की मंजिल है राहों में क्यों भटकती है,
तू मुस्कुरा कर जी ज़िन्दगी, के तुझें देख रूह हस्ती है...!!

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5 SEP AT 21:58

" ज़िन्दगी अच्छी है..... "

तुम नही होते तो बिखरा सा रहता हूँ मानों जैसे साँसें बहोत कच्ची है,
असल में क़रीब कुछ नही मगर कहने को ज़िन्दगी अच्छी है....!!

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30 AUG AT 23:13

" फ़साना..... "
उन्हें मिली नही मोहब्बत किसी की,
और हमें उनमें ज़माना मिल गया,

तक़दीर को अपनी अहमियत दिखाने का,
फिर से एक बहाना मिल गया,

वो ढूँढते रहें मकानों में घर का सुकूँ,
और हमें उनकी बाहों में ठिकाना मिल गया,

उम्र गुज़ार दी उन्होंने ख़्वाहिशें संभाल कर,
हमें उन जैसा ख़ूबसूरत नज़राना मिल गया,

वो बिछड़ गए आख़िर में ज़माने को देखकर,
और हमें इश्क़ का सबक पुराना मिल गया,

ये दुनियां है यहाँ दुनियादारी है मेहबूब,
तुम्हें इज्ज़त मिली और हमें फ़साना मिल गया...!!

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