दुनिया ये बस नक़ाब ओढ़े है चेहरे पे,
हटाओगे तब मालूम होगा एक ही में कई किरदार छिपे हैं-
हर इंसान कहीं न कहीं सच्चा होता है,
कभी कभी थोड़ा रोना भी अच्छा होता है
अक्सर हारते हैं लोग अपने आप से ही,
शुरुआत में तो हर खिलाड़ी ही कच्चा होता है,
कभी कभी थोड़ा रोना भी अच्छा होता है
उम्मीद न हो जिसकी शायद होने की,
जो हुआ वो अपने ही कर्मों का गुच्छा होता है,
कभी कभी थोड़ा रोना भी अच्छा होता है
गिरते हैं उठते हैं धक्के खाते हुए सभी,
आख़िर हम सब में कहीं छुपा हुआ एक बच्चा होता है
कभी कभी थोड़ा रोना भी अच्छा होता है
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तेरे हाथों में लगी मेहंदी देखकर ये अफ़सोस होता है,
काश उस रोज़ तेरी गली की तरफ़ मुड़ गए होते-
फिसलता जा रहा है वक्त सबके हाथों से हर पल यूँ ही,
इन लोगों को गुमाँ ऐसा है मानो कल आयेगा ही नहीं-
क्षण में अदृश्य हो गया,
क्षण में आगमन होगा,
अन्तर्मन में अन्वेषण करना,
इसी हृदय में घोषण होगा
जब लगे अनंत अंधकार विराजने,
जीवन की कठिन परिस्थितियाँ,
जो संभव आज न हो पाया,
वो निश्चित ही कल होगा
निर्मल हो गया है जो,
कहीं इस धरातल से उठकर,
उसकी प्रार्थना की शक्ति से ही,
स्वयं तुम्हारा मंगल होगा-
ज़ुल्फ़ें सफ़ेद हो गई तो क्या, इश्क़ आज भी बरक़रार है,
तेरी आँखों का यूँ चढ़ता हुआ नशा, अब भी मेरे सीने पे सवार है-
ख़रीदने गया बड़ी शौक के साथ मैं दुनिया के बाज़ार में कुछ,
हर इंसान वहाँ बस मुझे ज़मीर का सौदा करता मिला-
जीवन जय का आशा स्रोत,
भाव विभोर नतमस्तक होत,
बिना समाज का बोझ लिए,
पंख आकाश में खोल दिए
कठिन अपार चाहे हो परिस्थिति,
ईश्वर स्मरण दिलाए उपस्थिति,
पराजय की बाहें मोड़,
पर्वतों को आया पीछे छोड़
आज कहता हूं विश्वास समक्ष,
आ जाओ जो भी है विपक्ष,
मात पिता का ले आशीर्वाद,
विजय शंख से गूंजे आकाश-
जो बिना कुछ कहे आपकी भाषा समझ ले,
जो बिना आपको टटोले आपका मन पढ़ ले,
और जो बिना कुछ माँगे सब आपको दे दे ,
संसार के उन सभी औरतों को ईश्वर ने माँ नाम दिया है-