राहुल सम्राट   (राहुल सम्राट79)
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Joined 12 June 2020


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Joined 12 June 2020

दिमाग के इशारे पर ’चलने वाला दिल ..
दिल के इशारे पे चलने वाले दिमाग पे भारी है..

तुम करो रूह की तरफदारी प्यारे...
रिश्तों का दूसरा नाम ’अब समझदारी है..

हालातों के जमीन पर होंगे दिल के फैसले..
मोहब्बतों के नाम पर जीना दुश्वारी है..

गए वो दिन ,नादानियों के ,संभल जाओ..
यहां जो मजबूत है ,हर काम में उसी की बारी है।

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व्यक्तित्व की नाकामियां ,रिश्तों में परेशानियों का सबब है...
यहां कोई बेवजह ,किसी को टूटकर चाहा कब है!

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उसके ख्यालों की बारिश ’मेरे दिल के मौसम पर भारी है..
है ये उसकी नादानियां "या फिर इश्क़ की जिम्मेदारी है...

मैं अल्हड़ सा लड़का ’समझदार होने लगा..
छोड़ कर मस्तियां ,कमबख्त ’सपने संजोने लगा..

लगता है “ये गहरे जज्बातों की सवारी है...
शायद ये ’जिंदगी और मोहब्बत की यारी है..

चलो अच्छा है ,बदलाव भी बहुत जरूरी है..
कभी है मन बहुत कोमल ’तो कभी मगरूरी है...

न जाने एक धड़कन में ’कितनी भावनाओं की पिटारी है..
कभी हंसी है लबों पर ,कभी बेखुदी और खुमारी है...

मैं अभी पहुंचा नहीं हूं अपनी मंजिलों पर सम्राट..
टीके हैं पांव अभी रस्ते में ,जीवन की जंग जारी है..!

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सच किताबों का श्रृंगार बन चुका है..
झूठ व्यापारो का जुगाड़ बन चुका है..
जरूरतों के बदौलत ,बदलेंगे अब किरदार सबके..
महत्वकांक्षाओं से घिरा आदमी ’बीमार बन चुका है...!

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रद्दी कागज की तरह है “मर्द बिना पैसों के..
सुनना पड़ता है ऐसे हालात में ,ऐसे ऐसों के...
जेब के वजन के मुताबिक निभते हैं ’अब रिश्ते ....
खुलते हैं ज़रा देर से पर्दे ’तजुर्बों के रहस्यों के।

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मेरी सांसों में तेरे हीं ख्वाब की दुनियां है..
तू मेरे ख्यालों की खूबसूरत फगुनिया है।

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मेरी निगाहों में बसी हो जिसकी दुनियां..
वो मेरी जिंदगी का खूबसूरत आईना है।

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वो लायक नहीं थे हमारे..
जिनको समझा था हमने सहारे..
दिल पागल था जिनके लिए,..
वो कर मुझको जिंदगी से किनारे।

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समझाना इश्क़ को ,आसान नहीं होता..
है कौन जो ,अपने महबूब के लिए नहीं रोता..
सबकी जिंदगी में ,आते हैं ये मोड तीखे ..
कोई यहां इकलौता है ,जो अपने खास रिश्ते नहीं खोता।

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हमारी धड़कने तुझमें..
सफर करती थी..
तुम्हारी मोहब्बत ..
’हमारी सांसों को बेहतर करती थी..
काश तुमने सोचा होता..
,चार दफा मेरे बारे में..
जी नहीं रहे होते हम तुम..
,ऐसे किनारे में..
अब जो कहते हो तुम ..
,की जी नहीं लगता तुम्हारा..
अब और मुश्किल होने लगता है..
,मेरा अपना गुजारा।


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