yqtv
132
Quotes
22
Followers
3
Following

Pushpansh Upadhayay

Pushpansh Upadhayay 4 DEC AT 19:12

तू दूर कोई चाँद है, जिसका तस्सवुर करना मेरी औकात नहीं,
मैं उड़ता एक पतंगा हूँ, जो फना हुए तेरी आस में कहीं....

-


3 likes · 1 comments · 2 shares
Pushpansh Upadhayay 15 NOV AT 14:43

तुम अब एक ख्वाब से ज़्यादा कुछ नहीं,
मेरा अक्स हो आईने का, पर मेरे साथ नहीं...
चाहा है, चाहूंगा हर ख्वाहिश से ज़्यादा तुम्हे,
चाहे तुम्हारी मंज़ूरी मेरे साथ हो या नहीं....

-


2 likes · 2 shares
Pushpansh Upadhayay 13 NOV AT 22:06

एक अनजान सी राह पर दबते पाँव चल रहे हैं हम,
मुस्कराहट है गालों पर, नज़रों से कुछ और ही कहानी गढ़ रहे हैं हम....

-


2 shares
Pushpansh Upadhayay 24 OCT AT 23:08

कुछ भीगे से पन्नों के सामने, अपने जज़्बातों को खंगाला है,
फिर उनकी भीनी सी महक को अपने लफ़्ज़ों से सवारा है....

-


3 shares
Pushpansh Upadhayay 19 OCT AT 12:55

अल्हड, अलमस्त इन नादानियों में मदहोश हूँ मैं,
तुमको क्या पता, खुदी से खड़ा कितना दूर हूँ मैं,
शाम तो रोज़ की तरह आज भी दस्तक देकर चली जाएगी,
दरवाज़े पर खड़ा, तेरे दस्तक की आहट का इंतज़ार किया करता हूँ मैं....

-


3 likes · 3 shares
Pushpansh Upadhayay 10 OCT AT 0:37

यूँ तो हर रोज़ मेरे दिल में कुछ उमड़ता है तुझे समझाने के लिए,
यूँ तो बोहोत कुछ है जो करना चाहता हूँ मैं तेरे लिए,
माना गुजारिशों के दौर से गुज़र रहे हैं बीते दिन से हम दोनों,
अब तेरे हर ख्वाहिश को अपनी ज़रुरत बनाना है तेरे लिए....

-


1 likes · 2 shares
Pushpansh Upadhayay 8 OCT AT 17:02

इंतज़ार के इस सिलसिले को थाम लूँ, ये चाहा है मैने,
तेरे मेरे दरमियान इस फासले को कम कर दूं, ये चाहा है मैने,
यूँ तो ज़ाहिर करने को बोहोत कुछ होता है मेरी आँखों में,
पर मेरे तसवुर में पिरोई तेरी अदा को छुपार रख लू, ये चाहा है मैने....

-


1 likes · 2 shares
Pushpansh Upadhayay 5 OCT AT 1:00

डर लगता है इन तमाम अन्जानी गलियों से गुजरते हुए,
पर जानी पहचानी गली, अब किसी दूजे मंज़िल का ज़रिया बन चुकी है....

-


3 likes · 2 shares
Pushpansh Upadhayay 30 SEP AT 20:25

ज़ख्म अभी भरा नहीं, पर रक्त है उबल रहा,
बौखलाहट ने ज़ोर से, ज़मीर को हिला दिया?

प्रबल हुई चिंगारी जो, अब बन गयी एक आग है,
गलियों से गुज़र रही, सब करती जाती ख़ाक है...

मसरूफ रहा हर वक़्त जो, तमाम रंगीनियों में,
अब अँधेरे में है खोजता, खुदी का अक्स सपनो में...

अंत हुआ अनंत का, अब अंगार बानी राख हैं,
जन आंदोलन है बदल रहा, लिखता नया ये पाठ है...

-


2 likes · 2 shares

Fetching Pushpansh Upadhayay Quotes