Punit Pandey   (पुनीत_पाण्डेय)
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Joined 20 June 2019


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8 OCT AT 16:34

सुनो, चाँद को उसकी जगह दिखानी होगी,
बस तुम्हें माथे पर एक बिंदिया लगानी होगी।

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27 SEP AT 19:26

इस कदर नाराज़ था मैं,
कि बयाँ भी करूँ तो मैं कैसे करूँ...

मिलते ही लिपट के रो पड़ी वो,
अब ऊँची आवाज़ भी करूँ तो कैसे करूँ...

चलो, आँखों से ही ज़ाहिर कर देता मैं नाराज़गी अपनी,
लेकिन दिखाने को आँखें भी मैं अपने सीने से उसे जुदा करूँ तो कैसे करूँ।

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12 AUG AT 19:27

मैं प्रेम की परिभाषा तो नही जानता,
लेकिन इतना जानता हूँ..
कि कितनी मुश्किल है बिछड़न,
दो हथेलियाँ जब हौले-हौले विपरीत दिशा में अलग होती हैं,
भौंहे झुकतीं हैं और
होंठ थरथराते हैं,
साँसे मध्म और
और धड़कनें तेज हो जाती हैं।
आँखों से जो पानी बहता है,
वो प्रेम-प्रेम ही कहता है।

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11 JUL AT 18:22

उसने पूछा,
है कितना सुहाना मौसम,
क्या आती मेरी याद नही...
मैने कहा,
मेरा दिल धड़कनें लेता तेरे नाम की,
तेरी याद किसी मौसम की मोहताज़ नही!

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7 JUL AT 17:08

यूँ बखूबी उसे इश्क़ मयस्सर करना आता है,
कि आँखों से आँखों में उतर के,
उसे दिल मे घर करना आता है।

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4 JUL AT 14:34

......

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15 JUN AT 17:30

तेरी-मेरी बातेँ,
सर्द हवाएँ,
धूप सुनहली..
तपिश बढ़ी सूरज की,
मौसम बदला,
ऋतुएँ बदली..
और बातेँ अधूरी छूट गई।

अब जो करवट ली है
फिर मौसम ने,
लगता है फिर
बरसात होगी..
अबकी जो होगी बात
तो वो बात भी होगी।

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5 JUN AT 19:02

जाने कितने मसनद बदले मैंने,
ना रेशम काम आए,
ना मखमल काम आया!

एक पल को जो तेरी गोद मे सोया,
तो अरसे बाद ली साँसे सुकून की,
दिल को बड़ा आराम आया!

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27 MAY AT 16:07

मुझे पसंद है तेरी मोतियों की माला,
ताउम्र ये तेरे सीने से लगे!
और जब टूटकर गिरे,
तो तेरी बाहों में गिरे!

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18 MAY AT 20:02

जब भी गुजरा यादों के गलियारे से,
तस्वीरों के दरमियाँ मैं भटकता रहा!

कंही पैर थमे,
कंही कैद हुए,
कंही मुस्कुराया,
कंही खड़ा बस सिसकता रहा!

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