Puneet   (# पुनीत उवाच)
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Joined 8 April 2018


Joined 8 April 2018
17 HOURS AGO

तेरे अफ़सानों में हम भी नज़र आएँगे,
बिन बताए तेरा हिस्सा कहे जाएँगे।

नाम लेना न चाहे तो कोई ग़म नहीं,
तेरे किस्सों में ख़ामोशी से उतर जाएँगे।

तेरे अहसास से रिश्ता गहरा इतना है,
तेरी साँसों की तरह दिल में ठहर जाएँगे।

जब गिरेगा परदा इस ज़िंदगी के मंच पर,
तेरे सपनों की रूह बनकर बिखर जाएँगे।

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20 HOURS AGO

तुझसे बात होती है,
तो सारे जज़्बात उमड़ आते हैं,
लफ़्ज़ होंठों तक आते हैं,
मगर रूक जाते हैं।

तेरा फोन बंद मिलता है,
तो साँसें रुक जाती हैं,
उलझे ख़्यालों में तेरी तलाश
बेक़रारी बन जाती है।

तेरी आवाज़ में छुपा है
मेरे दिल का सुकून,
तेरी खामोशी में भी
है मोहब्बत का जूनून।

तू जो पास हो,
तो वक्त रुक जाता है,
तेरे बिना ये दिल
ख़ुद से ही रूठ जाता है।

तुझसे बात होती है
तो समझ नहीं आता… क्या कहें,
तेरा फोन बंद रहता है
तो समझ नहीं आता… क्या करें।

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22 HOURS AGO

सभी का खेल अलग है, सभी का जीवन अलग है,
कभी है इश्क़ मोहब्बत, कभी दर्पण अलग है।

कभी नज़र में उजाला, कभी ख़याल में तन्हाई,
कभी सफ़र में मंज़िल, कभी दामन अलग है।

कभी दुआओं का मौसम, कभी फ़ना की ख़ामोशी,
कभी रूह का साथी, कहीं का सावन अलग है।

कभी सरूर का आलम, कभी दर्द की महफ़िल,
कभी सुकून सागर जैसा, कभी का जीवन अलग है।

वही है राही, जो सब्र में ठहर जाए,
हर इक राह मुश्किल है, सभी का गगन अलग है।

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26 AUG AT 19:39

तेरी छोटी-मोटी ख़्वाहिशें पूरी कर दूँगा,
चाँद-तारे न तोड़कर ला पाऊँगा।
तेरा नया-नया आशिक़ हूँ,
तेरे ख़यालों में ख़ुद को ग़ुम कर जाऊँगा।

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26 AUG AT 19:19

जहाँ भी इश्क़ का उजाला किया है,
वहीं अँधेरों ने किनारा किया है।

अहंकार की दीवार ढही ख़ुद-ब-ख़ुद,
जब भी मोहब्बत ने इशारा किया है।

करुणा की ख़ुशबू से महक उठे आलम,
सहानुभूति ने कर गुज़ारा किया है।

इश्क़ ही इंसानियत का असल सहारा,
जिसने हर दिल को गवारा किया है।

मैं गवाह हूँ बदलती हुई दुनिया का,
जहाँ भी प्रेम ने इश्तिहार किया है।

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26 AUG AT 14:37

हर कोई कहता है,
मुझसे छिन गया बहुत कुछ,
कभी वक्त, कभी मौका,
कभी अपनों का साथ।

पर कोई यह क्यों नहीं कहता,
कि मिला भी तो बहुत है—
सांसें, रिश्ते, अनुभव,
और जीने की नई सुबह।

शिकायतें आसान हैं,
क्योंकि वो हमें कमी का आईना दिखाती हैं।
पर शुक्रिया कठिन है,
क्योंकि वो दिल में संतोष जगाती है।

अगर नजरें हट जाएँ क्या नहीं मिला से,
और टिक जाएँ क्या मिला है पर,
तो हर पल दुआ बन जाएगा,
और जीवन शिकायतों से नहीं,
शुक्र से भर जाएगा।

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26 AUG AT 13:30

कुदरत का कमाल ही तो है,
कि तू दूर होकर भी मेरा ही लगता है।

जब मिलना मुक़द्दर में लिखा हो,
तो रास्ते ख़ुद-ब-ख़ुद खुल जाया करते हैं।

तेरी मुस्कान…
मेरे जीवन की सबसे हसीन साज़िश है,
जिसे रचा है वक्त ने,
और सजाया है तक़दीर ने।

कुदरत ने हमें बस मिलाया नहीं,
बल्कि हमारी रूहों के बीच
एक अनकहा समझौता करवाया है…
जिसे कोई दूरी, कोई वक़्त,
कभी तोड़ नहीं सकता।

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26 AUG AT 10:56

बाहर की महफ़िल में हँसी गूंज उठी,
मगर घर में चुप्पी सदा साथ रही।

दोस्तों से बातें हों बेइंतिहा,
साथी से क्यों लफ़्ज़ों में खामोशी रही।

रिश्तों की नींव है खुला सा बयान,
गलतफ़हमियाँ क्यों दिल में ठहरी रही।

मन हल्का हो जाता है जग से कहने में,
मगर सुकून तो साथी की बातें रही।

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25 AUG AT 12:51

दुनिया देखने को सफ़र दर-बदर नहीं,
आँखें बंद कर लो तो क्या कम सफ़र नहीं।

ख़्वाबों की सरज़मीं पे नज़ारे हज़ार हैं,
दिल में उतर न जाएं तो वो मंज़र नहीं।

रूहानियत की मस्त हवाएँ जो छू गईं,
फिर और किसी रंग का होता असर नहीं।

मस्ती-ए-इश्क़ में जो खोया है इश्क़वर,
उससे हसीन और कोई भी सफ़र नहीं।

दिल की गली में ढूँढ तेरी मंज़िल वही मिले,
बाहर हज़ार राह सही, राहबर नहीं।

पुनीत ढूँढता रहा है जहाँ में सुकून-ओ-चैन,
सच्ची ख़ुशी मिलेगी तुझे और कहीं नहीं।

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24 AUG AT 19:46

आज तुझसे बहुत कुछ कहना चाहता था, मगर मैं रुक गया,
दिल की हर धड़कन तुझ पर रखना चाहता था, मगर मैं रुक गया।

तेरी आँखों में झलकता था एक आलम जुदा,
उसमें डूबकर ख़ुद को खोना चाहता था, मगर मैं रुक गया।

लबों तक आ गए थे कई अरमान-ए-दिल मेरे,
तेरे सामने सब कुछ कहना चाहता था, मगर मैं रुक गया।

फ़ासलों की दीवारें भी तोड़ सकता था मैं,
हर इक बंदिश को मिटाना चाहता था, मगर मैं रुक गया।

उस रुख़्सत की सदा ने बाँध दी साँसें मेरी,
जाते समय मुड़कर देखना चाहता था, मगर मैं रुक गया।

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