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सोशल हुए, स्पेशल हुए, हुए आम से खास
फुल के कुप्पा ईगो चौड़ा सभी कहें सब्बास!
नींद न आई रातों टर-टर मन मेढक भए उदास।
ढूँढा खुरचा बाहें झाड़ी हमको कौन सी प्यास!
रहे मगन नित नए सजन में कहाँ गड़ी है फाँस?
ये भी छोड़ो वो भी छोड़ो बातें करों पचास,
ख़ुद से मिलना भूल गए हैं रख मिडास से आस।

- प्रज्ञा


इधर उधर के लोगों से
जा जाकर मिल आए हम
लेकिन इस दौरान में हम
ख़ुद से मिलना भूल गए
#भूलगए #collab #yqdidi #YourQuoteAndMine
Collaborating with YourQuote Didi

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