प्रज्ञा मिश्र   (प्रज्ञा)
133 Followers · 98 Following

read more
Joined 20 September 2018


read more
Joined 20 September 2018

राष्ट्रीय बेड़ा-गड़क-दिवस और
गयी-भैंस-पानी-में दिवस की
आधुनिक तुग़लक़ को बहुत-बहुत बधाई।
आज खुश तो बहुत होगे तुम।
हैप्पी budday 🖤

-



हो रही थी थोड़ा स्वतंत्र
गला थोड़ा थोड़ा रुँधा था
मेरे भीतर से तुम्हारा प्रेम
जब आँसू बनकर निकला था।

-



सुनो
मन मीत
मन मोहक गीत
मधुर मिलन जाएगा बीत

-



कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे

यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे

-जौन एलिया

-



फिर हिंदी के हालात
अपने आप बदल जाएंगे।

हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

-



लम्हे समेटते हैं बिखर जाने के बाद
एहमियत माँ की मालूम हुई
एक माँ बन जाने के बाद
शिकन बाप के माथे की नज़र आई
विदा हो जाने के बाद

देखा है धीरे-धीरे समय पलट कर
एल्बम की सभी तस्वीरों में
पिछला जन्म रहा होगा कोई
भला बचपन लौटा है कभी
बेवक़्त बड़ा होने के बाद।

-



बिखर जाने के बाद
भला बचपन लौटा है कभी
बेवक़्त बड़ा होने के बाद?

-



उल्लास

शायद प्रेम के अभाव में
जीवन का उल्लास
बन जाता है बालू का टिब्बा
इसमें भटकन है यायावरी है!
जिजीविषा से जन्मे हैं कैक्ट्स
पत्ता पत्ता काँटा बनकर
रेगिस्तान को यही हासिल हुआ।

-



दुख ही जीवन की कथा रही,
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही।

- निराला जी की 'सरोज स्मृति' से

-



यदि प्रबंधकाव्य एक विस्तृत वनस्थली है,
तो मुक्तक एक खिला हुआ गुलदस्ता।

-आचार्य शुक्ल

-


Fetching प्रज्ञा मिश्र Quotes