प्रज्ञा मिश्र   (Pragya Mishra 'पद्मजा')
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Podcaster , Blogger
Joined 20 September 2018


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तस्वीरें तुम्हारे लिए लीं हैं
तुम तो माँगते ही नहीं
इसलिए अच्छा लगता है
लेना तस्वीरें तुम्हारे नाम से
तुम जताते हो प्यार ऐसे
जैसे सर्दियों की सुबह में
मेरी कम्बल प्यार जताती है
न मैं बाहर आना चाहती हूं
न गर्माहट कम हो पाती है
(१-३-२०१९)

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इश्क़ आता है
दुनियादारी नहीं आती
दिल आता है
अय्यारी नहीं आती

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AI की चालाकी से
दिमाग कुंद होता रे बाबा

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बाद में दुखी रहने से बेहतर है
आज अनुशासित रहना

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अपने निशाँ छोड़ते जाओ
ऐसे जैसे निश्छल प्रेम
की थपकी छोड़ जाती है
गालों पर एहसास प्यार का
ऐसे जैसे नीड़ का तिनका
चुनती चिड़ियाँ छोड़ जाती है
एहसास घर बसाने का

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When you are born into a world where you don't fit in, it's because you were born to help create a new one.

जब आप एक ऐसी दुनिया में पैदा होते हैं जहां आप फिट नहीं होते, तो इसका कारण यह है कि आप एक नई दुनिया बनाने में मदद करने के लिए जन्मे हैं।

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हर भाषा से ग्रहण करने चाहिए
नए शब्द, नई कहानियां और मिथक भी
भाषाएं यदि मिलना जुलना बंद कर दें
तो सभ्यता ठमक जायेगी

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कहीं एक घोंसला टूटा हुआ है
कबूतर का बच्चा चलता चलता
थक कर बैठ जा रहा है
ज़मीन पर पैरों से पीसी
बिखरी पड़ी हैं मधुमक्खियां
अधमरी सभ्यता जैसे
नाखून के सहारे लटक कर
जीवन में बने रहने का
अंतिम प्रयास कर रही हो

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आज सोते सोते सुबह हो गई
और जागते जागते दोपहर
बन गए रात के लिखनिहार उलूक
किससे बतियाते जी भर कर

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वामांगी

तुम्हारे दाहिने हाथ की उंगलियों में
मेरे बाएं हाथ की उंगलियां
महसूस कर रही थीं कुछ अटपटा
मैंने चुना तुम्हारे बाईं ओर चलना
और सहजता के साथ मेरी दाईं उंगलियां
बस गईं तुम्हारे बांए हाथ की उंगलियों में
मैं साथी के सापेक्ष में वामांगी कहलाई
पर सब्यसाची स्त्रियां क्या कहलाएंगी
क्या वे भी होंगी सहज सापेक्षिक वामांगी
किंचित उन्हें आसान लगे साथी का दाहिना छोर
कितना सही है पत्नी का पर्यायवाची वामांगी?

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