नहीं तोड़िये डालियों से
फूल बहुत मेहनत से खिलते हैं,
दीजिये मोहलत माली को
धूप पानी मिट्टी सींच कर,
निहारने की पुचकारने की
उसने पाला है बच्चों की तरह
उकड़ू बैठ बैठ कर

- Pragya Mishra 'पद्मजा'