एक कविता थी जो कभी लिखी नहीं गयी, भूमिका बरसों रही मन में लेकिन अभिव्यक्त नहीं हुई, जाने क्यों उसका शीर्षक *स्वीट ड्रीम्स* रहेगा।

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