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प्रियांशी प्रज्ञा
(Priyanshi Pragya)
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घोर तम
इति...!!
इति...!!
Joined 20 December 2017
24 OCT 2024 AT 15:55
क्या तुमने देखा है...?
बीज का मिट्टी में अंकुरण होना?
नदी का वाष्प बन जाना?
या फिर तितलियों के पँख का
रंग जाना?
नहीं न?
फिर मेरा प्रेम तुम कैसे देख पाओगे?
हर विद्दमान चीज़ को
देखने के लिए
ईश्वर ने सिर्फ आँखें ही नहीं
एक आत्मा भी दी है...
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29 SEP 2024 AT 21:37
जो श्रेष्ठ है शब्दों में उस शब्द का नाम मानवता
धरा का अस्तित्व स्थिर है जिससे वो प्राण मानवता!!
पर की पीड़ा में जो अश्रु बहाये वो भाव मानवता
जिसपर जीवन धारा चलाय मान वो नाव मानवता!!
स्व को त्याग कर हाथ बढ़ाये वो अनुपम भाव मानवता
निर्जन तपते गृष्म पहर में वट वृक्ष की छाँव मानवता!!
विधि की इस वसुधा पर अब क्यों करती है त्राहिमाम मानवता
हे! तुम प्राण धरो, जागृत करो,ना करो अब विश्राम मानवता!!-