Priti Jaiswal   (Priti Jaiswal (Shivarga))
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Joined 30 November 2017


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12 AUG AT 10:09

शिकायतें नहीं करती, शिकायतों में रखा क्या है;
जो बदल गया, उसके बदलने से अच्छा क्या है।

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9 AUG AT 12:25

तुम्हारे घर से आते वक़्त

मैं अपनी दी हुयी किताबों के ढ़ेर से
उठा लाया
वो दीमक

जिसने मेरे कलम से लिखे तुम्हारे नाम पर
अपना घर बना रखा था।

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9 AUG AT 12:16

मेरे लिए
बहुत आसान होती हैं
वो परिभाषाएँ
जिनमें तुम्हारा नाम होता है।

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9 AUG AT 10:48

मेरे प्रेम में
तुमने था भेजा तस्वीर,

लगा के अपनी हथेली पर
मेंहदी का रंग;

अब उसी प्रेम के रंग से
मैं सजा रहा हूँ
तितलियों के पंख।

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9 AUG AT 10:26

प्रेम में मिल रही असफलताओं के बाद
होगा बस यही

कि बचा रहेगा प्रेम
उसी रूप में

पर होंगे प्रेमी प्रेमिका
काल्पनिक।

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9 AUG AT 8:47

लम्बी दूरी के रिश्तों के प्रेम में

प्रेमी प्रेमिका को
भेंट करता है

चाँद, तारे, सूरज, आसमान, ब्रहमाण्ड;

नहीं भेंट कर पाता है तो,
वो तीन शब्द और एक गुलाब।

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8 AUG AT 14:06

आसमाँ की सादगी तो देखो,
अपनी सादगी पे इसको जरा भी गुमान नहीं।

बयाँ तो करता है ये बहुत कुछ,
पर बयाँ करने को भी रखा है ज़ुबान नहीं।

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8 AUG AT 13:38

प्रेम,
महफिल में पहचान नहीं,

तुमसे तुम्हारा
अपनी निगाहों पर ठहरा
निगाह माँगता है।

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8 AUG AT 12:52

बात होती है जब भी कहीं इमारतों की,
मैं दिल में उसका मकां दिखाता हूँ।

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7 AUG AT 17:38

वक़्त के साथ,

देह वृद्ध हुआ;
प्रेम प्रगाढ़।

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