प्रीतम जोशी   (अनकहे किस्सो की कतरन)
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आओ बातें करे चार "7619986618"
Joined 21 May 2019


आओ बातें करे चार "7619986618"
Joined 21 May 2019

रोशनी
हर बार
हर साल
मकानों में
बढ़ती जाती है
इन्सानों में
घटती जाती है...!


E@kpreet

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हाँ अब मैं बदल गया हूं
कि अब मुझे लोगों की बातों का बुरा नहीं लगता....
कि अब मुझे लोगों से बहस करने का मन न होता
हाँ मैं बदल गया हूं
कि अब मुझे अपने दिल की बात किसी को बताना सही न लगता
कि अब मुझे अपनी हालत पर गुस्सा नहीं आता
हाँ मैं बदल गया हूँ
कि अब मैं लोगों से दूर भागता हूं
कि अब मैं खुद में खुश रहता हूं
हाँ मैं बदल गया हूँ
कि अब किसी के होने या न होने से फर्क़ न पड़ता
कि अब मुझे अपनी जिंदगी जीना अच्छा न लगता
हाँ मैं बदल गया हूं
कि मुझे सब खत्म करने का मन होता है
कि मुझे अब सबसे दूर जाने का मन करता है 🙂 🙂
हाँ मैं बदल गया हूँ.....
हाँ मैं बदल गया हूं बस पता नहीं क्यों 🙂🙂

~e@kpreet

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जो नहीं फेंक पाते खुद को किसी ऊँचे पुल से
जो नहीं लेट पाते रेल की पटरियों पर
जिनको ट्रेन की सनसनाहट से ही डर लगता है
जिनकी रूह फंदा देखकर झूलना तो चाहती है
पर टेबल पर चढ़ते ही पांव थरथराने लगते हैं
जो हिचकते हैं दुकानदार से सल्फास की दो गोली मांगने में
वे आत्महत्या का सबसे सरलतम तरीका चुनते हैं।
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वे जीना चुनते हैं साहब ...

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शून्य लौटता है
तो लौटकर आता नही शून्य
शून्य से चिपक जाती है
थोड़ी सी हवा, थोड़े से शब्द

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जीवन मे एक बार प्रेम जरूर कीजिएगा

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ज़माने भर की बुराईयाँ, ज़माने भर के डर एक तरफ़।।

तेरे हाथ में मेरा हाथ, और फिर ये कायनात एक तरफ़ ।।

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क्यों कि पापा ढाल होते है❤️
पापा नन्ही उंगलियों को थामकर चलना सिखाते है,
पापा कंधे पर बिठा कर दुनियां दिखाते है,
पापा मार्गदर्शक होते है,
पापा दोस्त होते है,
पापा बिजनेस पार्टनर होते है,
पापा गुरु होते है,
पापा ऑफिस मैं मिले स्ट्रेस का एन्टीटॉड होते है,
पापा हारते हुए बच्चे की शक्ति बन जाते है,
मां की अनुपस्थिति मैं पापा मम्मी बन जाते है,
क्यों कि पापा ढाल होते हैं,
पापा यार होते हैं❤️🤘
पापा दिवस की शुभकामनाएं 🤗

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अल्फाज़ ए शायरी पढ कर किसी ने पूछ लिया कभी इश्क हुआ था...

हम मुस्कुरा के बोले "आज भी है"...

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बिन कुछ कहे
बिन कुछ सुने
हाथों में हाथ लिए

चार कदम
बस चार कदम
चल दो ना साथ मेरे”

(सुशांत सिंह राजपूत) RIP

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आज भी चुभते बहुत है ।

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