जीवन की एक आधार, प्रकृति है नाम,,
बिपत्ति को भी दिला दे, आरम्भ की मान,,— % &-
_ I'm not a professional sayar
सायर की बस्ती से,रिस्ता तोड़ चुकी हूँ मे,,(2)
तू याद न आये,इसलिए लिखना छोड़ चुकी हूँ मे,,
बड़े हसीन थे,तेरे साथ वो किस्से,(2)
हर एक हिस्सों को जला चुकी हूँ मे,,
तू याद न आये,इसलिए लिखना छोड़ चुकी हूँ मे,,
तुझे खोने का जो डर था,ये डर जी चुकी हूँ मे
खुद पे भरोसा,खुद खो चुकी हूँ मे,,
अब..तू याद न आये,इसलिए लिखना छोड़ चुकी हूँ मे,,
-
काँटों की कैद मे,गुलाब बस्ता है...
दिल की दुनिआ से,अजीब रिस्ता है....
यंहा हसना भी पड़ता है,आंसू छुपाने को अक्सर(2)
मोहब्बत से ज्यादा,जो बेवफाई सस्ता है....-
क्या खूब रहा ये ज़िन्दगी,
भरी कस्मकस से गुजरता गया,,
कुछ रिस्तो को अपनाते गया,
कुछ रिस्तो को दफनाते गया,-
है,
हल्की-हल्की फुहार है,,
संग पिया के झूले आओ,
सावन का बाहर है,,-
यंहा जिन्दा रह ने मे....
खामोशी को अपना ने मे,
और सचाई को छुपाने मे-
शंख बजे सो शुभ होये,मुरली धुन से प्यार......
डम डम बजता डमरू शिव की,बिनास होये काल...-
Feel the song_
गम है,जुदाई है
ये इश्क़ है ऐसा........
कभी कभी बंदगी है
कभी मौसम के जैसा.......
हम तुम पतंग मांझे,बिछड़ने का दर्द फिर क्यों
करते हो सो सांझे,टूटने का डर फिर क्यों
-
डम डम धुन से,होके मगन ये
नाचे भोले, नील गगन मे.......
मुख तेजेस्वर है,कालो की काल
काल को हरने,आये महाकाल......-