28 SEP 2022 AT 13:51

इस दिल के जा़गीर पर
तेरे इश्क़ की दस्तख़त है
तुमने तो नभ को पार किया
हम ठहरे रहे जमीं पर ही
इसमें मेरी क्या खता है ?

ये वक़्त का तकाज़ा है
लिखूंँ हर फलक पर तुझे
परिंदे होकर भी हम उड़ न सके
पर तेरी क्या रज़ा है
बता मेरी क्या खता है ?

एक पल ठहर जाते
कुछ यादें नए बनाते
रेत सा फिसलता ये वक्त
यादें ही साथ रहता है
बता मेरी क्या खता है ?

- प्रीति प्रभा