Preeti Karn   (अनकही. ..)
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Joined 27 February 2017


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Preeti Karn 17 HOURS AGO

रवानी में अपनी रही रोज बहती
सम्हलती फिसलती ठहरती मचलती
किसीने जो पूछा कहानी पुरानी
फफक रो पड़ी जब भंवर याद आया।
शहर याद आया नगर याद आया ।

प्रीति

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Preeti Karn 12 OCT AT 19:42

शहर याद आया नगर याद आया,
बिछड़ के हमें हमसफर याद आया।
हवाएं लगाती रही रोज फेरे
मगर थक गयी जब असर याद आया।।

प्रीति

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Preeti Karn 12 OCT AT 7:22

मधुमासी ही स्वपन कुसुम हैं....
व्यर्थ चुनें क्यों खार यहां पर
कविताएं हैं सुरभित कानन
महक रही मह मह अति सुन्दर 🌹🌹

Preeti

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Preeti Karn 11 OCT AT 23:24

अब कहां बाकी है कुछ मुझमें
इक जरा सी....
हो गई हूं मैं नदी
सहरा कभी दरिया कभी!
छूकर बदलता मन मेरा
पत्तियां टहनी कभी कलियां कभी
गुलपोश भी...!

प्रीति

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Preeti Karn 10 OCT AT 7:47

भोगी हुई पीड़ाएं
चेचक के बदनुमा दाग हैं

दुखों की आशंका
दुर्भिक्ष के करुण प्रलाप....

तिल तिल कर मरता
आदमी
लालटेन से सूखता तेल.....


और जीवन
अबेकस पर सीखा
अंकगणित!


प्रीति

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Preeti Karn 9 OCT AT 19:27

इक नदी स्वयं कल्पना में,
कोर तक सूखी हुई है।
द्वंद का विन्यास करती,
तल अतल को चीरती है।

कंकड़ों से बिंध गया मन पांव पंकिल पूछते हैं,
ये नदी आखिर कहां जाकर उदधि को चूमती है।

घोर संकट में घिरी अस्तित्व का आधार ढूंढे
पिघलते हिमखंड की आकुल व्यथा महसूसती है

द्वंद का विन्यास करती तल अतल को चीरती है।

प्रीति

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Preeti Karn 9 OCT AT 8:06

कोई रावण मरा नहीं.... रक्तबीज भी जीवित है
सन्निधान कर बाणों का सीमाएं सब कलुषित है।

प्रीति

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Preeti Karn 8 OCT AT 8:47

मैं अपने. ही. कुविचारों और मनोवृतियों पर
बाण संधान करने में लगी हूं....
चूक जाती हूं पुन:पुन:!
कठिन है स्वयं पर विजय प्राप्त करना....!

प्रीति

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#शुभ विजयादशमी
#yqbabadidi

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Preeti Karn 7 OCT AT 17:18

स्वप्न बिंदु आकार गढ़े
आरेखित आशा निर्जर
अनुमेहा निरखे जन जीवन
चातक दृष्टि हुई कातर.....

जाग रहा है कौन भला
सूने मन की देहरी पर!!!
प्रीति

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# मन की बातें
#yqbabadidi #yqhindiquotes
#yqsahityayqdidi

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Preeti Karn 7 OCT AT 5:09



जगजननी जगदंबिका, कोटि नमन शत आज।
सिद्धिदात्री मां शुभदा, करो सफल सब काज।

प्रीति 🙏🌺🌺

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