Prashant Srivastava  
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Joined 15 April 2017


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Joined 15 April 2017
17 JAN AT 20:08

हां एक किस्सा बताना है मुझे प्यार का,
जिसमें और कुछ ना था ,
बस था एक इंतजार !
हां एक सवाल पूछना है मुझे,
कि क्या कभी किसी का इंतजार किया है ,
जब उसने बोला हो पांच मिनट का,
और घंटे बीत गए हो ,
और जब पास जाके के देखा ,
तो किसी और के साथ था वह !
कभी इंतजार किया है ,
किसी ऐसे अपने का जो तो मैंने अपना ही ना था !!
अफसोस बस इस बात का है कि ,
मैंने तो मोहब्बत दिल से किया था ,
लेकिन उसने शायद ही कद्र किया |

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4 JAN AT 21:56

यह कहानी है एक इश्क की ,
और एक दोस्ती की ,
पहले दोनों बचपन में मिले थे,
दोनों ने साथ में ही जवानी में कदम रखा, और फिर दोनों बिछड़ गए |
लड़की को कोई और पसंद था ,
लेकिन वो जी न सका !
और लड़के को यह लड़की पसंद थी !
कुछ साल बाद दोनों मिले,
और दोनों में इश्क हुआ ,
दिन बीते साल बीते ,
अब इस तरीके से हो गए पूरे 7 साल |
हां दोनों का इश्क सच्चा था,
लेकिन कहते हैं ना ,
जमाना प्रेम को नहीं समझता,
और अब एक परिवार ने अपनी इज्जत के खातिर -
दोनों को जुदा कर दिया ||
कहने को बस यह एक कहानी भर है,
लेकिन मैं इस कहानी को इसलिए जानता हूं ,
क्योंकि मैं उस लड़की का दोस्त हूं ||
यूं ही एक दिन मुझे यह बात पता चली,
और उस रात मैंने अपने रब से एक दुआ मांगी ,
उन दोनों के इश्क के खातिर ,
हां मेरा इश्क मुकम्मल अगर ना हुआ तो क्या हुआ ,
लेकिन जिनका था वह क्यों पूरा नहीं हुआ,
खैर जो भी हो मेरी बस यही दुआ है रब से ,
कि मेरी दुआ पूरी हो !!
बस एक सवाल है
क्यों यह जमाना प्रेम का दुश्मन बना फिरता है ?

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31 DEC 2020 AT 19:36

हां हर दफा जब भी इश्क को लिखा ,
तब एक दिल के दर्द को लिखा !
हां जब जब मैंने इश्क किया,
तब तब मेरा दिल टूटा |

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22 DEC 2020 AT 22:59

प्रेम कहो या इश्क़,
हर इश्क की एक कहानी होती है !
वह पहली बार मिलने से बिछड़ने तक की कहानी ,
पहली बार प्रेम का एहसास होने की ,
वह पहला इज़हार की ,
वह पहला इनकार की ,
या फिर इकरार की |
प्रेम एक ऐसा एहसास है ,
जहां बस उसके साथ भर से,
आप दुनिया जीत सकते हो !
और उसके ना होने से ,
आप एक दुनिया हार सकते हो !
प्रेम कभी पूरा करता है ,
तो कभी अधूरा ,
लेकिन इस अधूरे रहने और पूरे होने की बेचैनियों में ही,
प्रेम का एहसास है ||

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14 DEC 2020 AT 0:52

ना समझना कि मैं तुझसे दूर हूं,
पास तुम्हारे रहूंगा हरदम हर दफा |
माना इश्क का एक खेल अधूरा रहा हमारे दरमियां ,
लेकिन आज भी उतनी ही इज्जत तुम्हारी
मैं अपने पूरे दिल से करता हूं !
हां याद है मुझे संघर्ष का वह समय ,
जब पास मेरे कोई ना था ,
मेरी दुनिया पीछे छूट चुकी थी,
मेरे पास कुछ भी बाकी नहीं था,
लेकिन कुछ चंद लोग थे ,
और उन चंद लोगों में तुम भी थी
जो थे साथ मेरे !!!
सच कहूं तो अल्फाज नहीं है मेरे पास,
तुम्हारा और हर उस शख्स का शुक्रिया कहने को,
लेकिन जब भी पीछे मुड़कर मैं देखता हूं,
तो मैं ठहर जाता हूं |
हां वजह हो तुम मेरी हर कविता की,
तुम्हारी वजह से ही मेरे शब्द जिंदा है|
इन सबके बीच मुझे याद आता है,
एक दोस्त मेरा जिसने कहा था,
"तुमने जब भी लिखा है वह दिल से लिखा है |"
सच ही तो कहा था उसने वह मेरे दिल की ही आवाज थी,
क्योंकि हर कविता में छलका था दर्द मेरा !
याद रहेगी यह कविता भी क्योंकि मैंने इसे एक बार में नहीं लिखा है|

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13 DEC 2020 AT 1:32

नहीं शब्द है मेरे पास ,
लेकिन बस इतना लिखूंगा फिलहाल,
अपने ख्वाब की ओर ,
मेरी वह आखरी उड़ान ,
वह आखरी दौड़,
दुनिया याद रखेगी !!

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11 DEC 2020 AT 23:54

एक अरसा हुआ इश्क को लिखते लिखते,
लेकिन यह बयां आज भी नहीं हुआ ,
मैंने उसका ज़िक्र किया ,
जो मैंने तुम्हारे लिए महसूस किया|
हां सच कहूं तो मैं अब भी एक सफर में हूं ,
क्योंकि दिल से दिल का वह सफ़र,
शायद कभी पूरा ना हुआ|
जज़्बात शायद बाकी ना हो वह इश्क के, इश्क का यह दौर बस आखरी है,
लेकिन वादा है कि लौट आएंगे गलिया में तेरे ,
जब भी तुम्हारा दिल पुकारेगा दिल से!

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11 DEC 2020 AT 20:38

हां मालूम ना था किसी को अंजाम मेरा,
जिस रोज मैंने एक युद्ध को चुना था ,
कभी सोचा ना था कि कितना भयानक होगा संघर्ष मेरा |
हां मुझे याद है कि कुछ रोज पहले ही
मैं जख्मी होकर गिर पड़ा था,
अपने युद्ध को लड़ते लड़ते |
खैर युद्ध का क्या है,
यह तो बंद कुर्बानियां मांगते हैं ,
युद्ध भयानक होते हैं ,
और कई दफाअंतिम रास्ते भी !

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11 DEC 2020 AT 19:52

Ek raah me chalte chalte,
Yuhi kabhi dil ko chot lagi thi,
Mai kya batau meri vo chot,
waqt ke saath nasur ban gayi.
Man me gussa tha jamane ke liye,
Aur dil me kisi ke liye nafrat.
Haa waqt beeta,
Nafrato ka daur bhi beet gaya,
Vo jhakham bhi bhar gaya,
Lekin reh gaya tha mai,
Akele ek anjaane se sehar mein.
Haa jakham Jaroor bhara tha,
Lekin Mai to vahi khada raha,
Jahan logo NE saath chora tha,
Ek umeed mein ki kabhi koi
lauta to afsos na ho use .
Lekin intezar hamesha intezar hi raha,
Na koi zakhm bhara,
Na hi koi kabhi lauta.
Haa aaj bhi vahi Milunga tumhe,
Baat jahan adhoori reh gayi,
Ho sake to kabhi laut aana,
Yu hi milne, ya Saath chalne.

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9 DEC 2020 AT 21:49

Bas iss kashmakash mein
neend aankho se dur thi,
Ki dil me jajbaat rakhu ya
pathar ki trah sakht ho jaau.
Kisi bhi rishte ke liye,
Bhawna rakhu ya nafrat me
rishta Tod jaau.
Ek rishte ka faisla Shayad dil ke
nyayalay mein hoga..
Tutenge dil kai,
Aur karmo ka fal yha milega.

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