Prashant khakare   (Prashant khakare ✍️)
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Joined 28 December 2017


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Joined 28 December 2017
Prashant khakare 1 DEC AT 16:34

खैरियत पूछ लिया करो, कभी कवार चांद की
आखिर अकेला इंसान हैं, सब जगह उजाला
फैलाकर खुद अंधेरे में ढल जाता है

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Prashant khakare 30 NOV AT 22:07

नादान सी हूं मैं, जरा सा हसने तो दो
पंख फैलाए बैठी हूं, जरा सा उड़ने तो दो
ख़ामोश हूं मैं जिंदगी से, जरा सा बोलने तो दो
लड़की हूं तो क्या हुआ, जरा सा चैन से रहने तो दो

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Prashant khakare 24 NOV AT 20:27

घुंघट में चेहरा छिपाए वो हरकते बड़ी करती हैं,
एक मां होकर भी अपनी हि बेटी की बली लेती हैं !

धूप में तपकर भी वो छाव की जरूरत नहीं समझती हैं,
एक लड़की होकर भी वो लड़की का दर्द नहीं समझती हैं !

चेहरा मासूम सा हैं पर अंदाज इनका निराला होता हैं,
बेटे की जगह बेटी हुई तो इनका दर्द भी जहरीला होता है !

धरती मां की आंखो में भी खून के आंसू आते हैं,
जब खुद की कोक एक मासूम को सुलाती हैं !

पत्थर दिल इंसान की फितरत जरा कमाल होती हैं,
जितना बड़ा पाप होता है उनके चेहरों पर
उतनी हि बड़ी हसी आती हैं !


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Prashant khakare 27 OCT AT 13:07

दिये जगमग जलते रहे, बाती युही साथ देती रहे
ना झगडा, ना ताण - तणाव लेकर, परिवार खुशी से खीलता रहे
दिवाली त्योहार हैं खुशियो का, उत्साह का, उमंगो का
इस बार दो पटाखे कम फोडिये, और किसी जरुरतमंद को दिवाली की अनमोल खुशिया बांटिये

यहा रात में उजियाला और दिन मे तारे खीलते हैं
ये सबसे बडा त्योहार दिवाली हैं, यहा तो खुशीया मनाने के बहाणे मिलते हैं !!!

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Prashant khakare 22 OCT AT 0:51

देखनी हैं प्रेम की परिभाषा तो राधेश्याम बनकर देखलो,
सिखनी हैं सत्य की परिभाषा तो सिताराम बनकर देखलों,
देखणी हैं मौत की आहट तो कब्रिस्तान बनकर देखलो,
और सुननी हो एक मां की पुकार तो हिंदुस्तान बनकर देखलो !!!

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Prashant khakare 22 SEP AT 10:51

इश्क की स्याही से लिखे हुये बोल और निखर आते हैं
होकर प्यार में पागल प्यार की किताब मे पन्ने बेतहाशा बिखर जाते हैं

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Prashant khakare 17 SEP AT 17:55

आँखो से निकली इश्क की बुंदे
अब समंदर बनकर बह रहि हैं
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आँखो हि आँखो मे हो रहि प्यार की बाते
अब बेजुबां इश्क कर रहि हैं

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Prashant khakare 6 SEP AT 10:08

इश्क में मर जाती हैं कई जिंदगिया,
अपने अपने प्यार के खातीर

जात - धर्म के विवादो में फसकर,खुद मिट
जाते हैं अपने इंसाफ के खातिर

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Prashant khakare 9 JUL AT 11:19

टूटा - फुटा घर मेरा, बस दो वक़्त कि रोटी हैं
हम बुरी हालातों से लड़ने वाले किसान,
हमारी जिंदगी बहुत छोटी है !!!

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Prashant khakare 5 JUN AT 13:03

चांद से भी रोशन तुम्हारा दिन हो
ना जात - धर्म का कोई भेदभाव हो !!
ईद के दिन आपकी हर तमन्ना पुरी हो जाए
आपकी हर दुआ आज कुबूल हो जाए !!

!! ईद मुबारक !!

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