मिलो फुर्सत मे किसी इतवार को,
मैं उतना भी बोरियत नहीं......
जैसे मिलता सोमवार से शनिवार को।-
उलझनों को सुलझाना,
हर बार मेरे बस मे नहीं।
लेकिन.......
सुलझे को सुलझा रखूँ,
बस इतना मुझे आता हैं।-
अटल रहूँगी जिम्मेदारियों के पथ पर,
मैं अपना कर्तव्य निभा लुंगी,
तुम तिनका-तिनका समेट लाना,
मैं नीड़ बना लुंगी।-
आज अंधेरा हैं तो क्या हुआ,
कल सवेरा जरूर होगा।
आज लब्ज मौन हैं तो क्या हुआ,
कल हर शब्द सवाली जरूर होगा।
आज मजधार मे हूँ तो क्या हुआ,
कल साथ किनारा जरूर होगा।
आज भीगा ही तो हूँ आँसुओ की धार से,
कहाँ मैं माटी का पुतला??
कल नैनो मे चमकीला सितारा जरूर होगा।
ये हौसला भी किस माटी का हैं,
जो गिरता हैं सम्भलता हैं।
ढल जाता हैं वक़्त मगर,
मेरा हौसला कहाँ ढलता हैं।
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अटल रहूँगी जिम्मेदारियों के पथ पर,
मैं अपना कर्तव्य निभा लुंगी,
तुम तिनका-तिनका समेट लाना,
मैं नीड़ बना लुंगी।-
संगमरमर सा हैं तू कहाँ,
जो पाँव तले टिकने ना दे।
तू तो है मेरी माँटि सा,
जो मुझे खुद मे समाने आया हैं।-
किसी का उदाहरण लेना तो आसान हैं,
लेकिन किसी के लिये एक अच्छा उदाहरण बनने के लिये संघर्ष पथ से गुजरना जरुरी होता हैं। ....🙌🧗♂️-
कारवां इस जिंदगी का,
अभी रुका कहाँ हैं??
अभी तो....
हकीकत अय मुस्कुराहट को सलाम ठोकना बाकी हैं।-
घर आँगन तुलसी महके,
रहे ईख सी मिठास।
हर्ष उल्लास से मांगलिक कार्य हो,
सिद्ध हो हर काम-काज।
देवउठनी एकादशी की शुभकामनायें.. 🙏-
जो खुद के भविष्य को जमाने की फिकर करते हैं,
वो जमाने की फिकर नहीं करते।-