Prakirti   (ķm pŗāķįŗţį)
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Joined 5 June 2020


Joined 5 June 2020
12 JUN AT 15:56

ईर्ष्या 👇👇

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24 JAN AT 19:44

प्रकृति 👇👇👇

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23 JAN AT 22:51

That friendship🌸🌸

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22 JAN AT 13:56

तुम पिघलते ज्वाला की तरह
मैं वसंत ऋतू की छाव प्रिय
तुमसे ये रौशन जग मेरा
ठंडक लिए ये शाम सुनहरे।

काया से पलट जब देखु तुझको
कोरे पन्ने की तरह मिलते मुझे
जब भी लिखू अपनी दास्ता
अपने से हर बार लगते मुझे।

अपनी भी अजीब सी कहानी है
भाव की होती रुत सुहानी है
दूर होके भी दूर नही कभी
यही रीत की अद्भुत कहानी है।

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21 JAN AT 8:26

इंतज़ार👇👇👇

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13 JAN AT 10:39

Two little girl 👇👇

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9 JAN AT 20:09

सुबह की बेला सूर्य का वास,
रौशन मन है दिव्य आभास,
बहती धुन मन नदी सम,
ज्यों खुद गंगा बुझा रही प्यास।


शनैः-शनैः खिले पुष्प हजार,
उपवन में छाए बहार,
भँवरा मग्न हो करे सत्कार,
तितली का जब करे दीदार।

दुपहरिया कानों में जब गाये,
समां अनुपम राग थमाए,
धुप प्रचंड से तन खिल जाए,
अपने प्रभाव का रूप दिखाए।

रात की बेला जब घर आये,
चाँद बन चाँदनी नृत्य कर जाये,
तब तारों का जमावड़ा सजे,
चंदा दूर बैठ मुस्कुराए,
काली घाटा को दूर भगाये,
मन हर्षित कर हमें रिझाये।

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8 JAN AT 21:31

Melody

Rhythm of your heart
I can hear from beneath
Your voice is the pure melody
Which brings immerse joy indeed.

Everything seems special
When you stay with me
Melodious song i can hear
Without any tune in.

My liking is kinda wired
But your presence makes it Special
Let me enjoy everything
With immerse melody within.

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8 JAN AT 12:20

छल छल जो अंबर बरसे
नील कंठ को भाए रे
नैन कपाली ज्योवन तरसे
गीत जिया की गाए रे।

उपवन कारी नैन कटारी
भाग्य जिया के जगाए रे
सूख गई तृषा कंठ की
मेघा दूर खड़ी मुस्काई रे।

भोग लगाए जो जिया की
अंग अंग तृप्त हुआ जाए रे
काया से ओझील हुई कपासी
तितलियों के रंग खिल आई रे।

भवरा डोले डाल डाल पे
पुलकित फूल इतराई रे
खत्म हुई आस पिया की
जौवन खिली खिली जाई रे।

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7 JAN AT 18:12

Two offspring in my house👇👇

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